नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बीएमसी चुनाव 2026 के शुरुआती रुझान आते ही शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने मतदान में गड़बड़ी, ईवीएम में हेरफेर और खुलेआम पैसे बांटने के आरोप लगाए। उनके इन बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि शिवसेना शुरुआती नतीजों से ही संतुष्ट नहीं है।
”हजारों वोटर्स के नाम लिस्ट से गायब”
संजय राउत ने कहा कि जिन इलाकों में शिवसेना (UBT), एमएनएस और कांग्रेस को मजबूत समर्थन मिलता है, वहां हजारों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से गायब थे। उन्होंने दावा किया कि कई लोग वोट डालने पहुंचे, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं था, जिससे वे मतदान नहीं कर सके। राउत ने यह भी आरोप लगाया कि कई जगहों पर ईवीएम खराब हो गई थीं और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “कई जगह जनता किसी और को वोट दे रही थी, लेकिन मशीन में वोट ‘कमल’ के निशान पर दर्ज हो रहा था।” इस बयान के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाया।
”चुनाव में खुलेआम पैसा बांटा गया”
संजय राउत ने कहा कि चुनाव के दौरान खुलेआम पैसे बांटे गए और सत्ता के दबाव में वोटिंग को प्रभावित किया गया। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को “सत्ताधारी लोकशाही” बताते हुए कहा कि आज ताकत और पैसे के दम पर चुनाव जीते जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। राउत ने यह भी कहा कि आचार संहिता के दौरान नगर निगम अधिकारियों और बीजेपी नेताओं की मीटिंग होना लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच हो, तो सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं महायुति की ओर से शिवसेना नेता मनीषा कायंडे ने संजय राउत के आरोपों पर पलटवार किया है।
उन्होंने कहा, “एग्जिट पोल हमेशा सही नहीं होते। हमें महायुति सरकार के पिछले साढ़े तीन साल के काम पर पूरा भरोसा है। हमने विकास के आधार पर लोगों से संपर्क किया है, न कि भाषा या क्षेत्र के नाम पर।





