नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में एनसीपी अध्यक्ष और राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पुणे के पिंपरी चिंचवड़ इलाके में बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने क्षेत्र में हफ्ताखोरी और भ्रष्टाचार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पास इस मामले के ठोस सबूत हैं। अजित पवार ने खुद पर लगे 70,000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने उन पर आरोप लगाए थे, वही आज उनके साथ नहीं हैं। उनका यह बयान महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल ला गया है और बीजेपी के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण का कड़ा पलटवार
अजित पवार के आरोपों पर बीजेपी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण ने कहा कि अगर बीजेपी बोलने लगे तो अजित पवार मुश्किल में पड़ जाएंगे। उन्होंने पवार को नसीहत दी कि आरोप लगाने से पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। चव्हाण ने कहा कि इस तरह के आरोपों को चुनावी समय में मीडिया के माध्यम से देने की बजाय संबंधित एजेंसियों के पास जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप प्रत्यारोप की मर्यादा तय होनी चाहिए और यदि पलटवार हुआ, तो इसे गंभीर रूप से देखना पड़ेगा, क्योंकि इससे सबसे अधिक परेशानी अजित पवार को ही झेलनी पड़ेगी।आईएएनएस के अनुसार रविन्द्र चव्हाण ने कहा कि यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस की पार्टी पर है और आरोप-प्रत्यारोप की सीमा पार हुई तो अजीत पवार खुद मुश्किल में पड़ सकते हैं।
चुनावी बयानबाजी और राजनीतिक निहितार्थ
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अजित पवार का यह बयान नगर निगम चुनावों से ठीक पहले भाजपा को निशाने पर लेने की रणनीति हो सकती है। वहीं रविन्द्र चव्हाण ने इसे अनुचित और चुनावी समय पर दिया गया बयान बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में मीडिया में बयानबाजी करने से बेहतर था कि एनसीपी नेता अपने सबूतों के साथ जांच एजेंसियों के पास जाते। इस बीच राजनीतिक गलियारों में दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बन गई है और आगामी चुनावों में इसका असर काफी देखने को मिल सकता है।
नगर निगम चुनावों में सियासी गर्माहट और मतदाताओं की नजरें
अजित पवार और बीजेपी के बीच हुए इस आरोप-प्रत्यारोप ने महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई को और तेज कर दिया है। जहां एक ओर अजित पवार ने हफ्ताखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कड़ा पलटवार करते हुए कहा कि ऐसे बयान से अधिक परेशानी पवार को ही झेलनी पड़ेगी। अब देखने वाली बात यह है कि आगामी नगर निगम चुनावों में इस बयानबाजी का किस तरह असर पड़ता है और दोनों पार्टियों की रणनीति में कितनी बदलाव आती है। इस राजनीतिक गर्मागर्म माहौल में महाराष्ट्र के मतदाताओं की नजरें दोनों दलों की हर हलचल पर टिकी हुई हैं।





