नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है। 7 सीटों पर होने वाले चुनाव के बीच सबसे ज्यादा चर्चा शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर है, जिनका कार्यकाल अब खत्म होने वाला है। क्या वे दोबारा राज्यसभा जाएंगी? इस सवाल पर उन्होंने खुद ही स्थिति स्पष्ट कर दी है।
“जनता का भरोसा मिला, आगे भी काम करूंगी”
मीडिया से बातचीत में प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पिछले छह वर्षों में उन्होंने जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाया है और पूरी मेहनत के साथ काम किया है। उन्होंने कहा, “जनता ने मुझ पर भरोसा जताया, मुझे भरपूर समर्थन मिला। मेरी पार्टी ने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी, जिसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी।
हालांकि दोबारा राज्यसभा जाने को लेकर उन्होंने साफ कहा कि वह किसी तरह का अनुमान नहीं लगाना चाहतीं, लेकिन देश और जनता के हित में काम करना जारी रखेंगी।
“राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी मौका मिला”
उन्होंने यह भी कहा कि एक ऐसी महिला, जिसका पहले राजनीति से सीधा संबंध नहीं था, उसे राज्यसभा में काम करने का अवसर मिला-यह उनके लिए गर्व और आभार का विषय है। उन्होंने दोहराया कि भविष्य को लेकर कयास लगाने के बजाय वह अपने काम पर ध्यान देना चाहती हैं।
MVA का गणित क्या कहता है?
महाविकास आघाड़ी (MVA) के पास मौजूदा विधायकों के आंकड़ों के आधार पर केवल एक राज्यसभा सीट जीतने की स्पष्ट स्थिति बनती दिख रही है। गठबंधन में कांग्रेस (16), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद पवार गुट (10) और शिवसेना ठाकरे गुट (20) यानी कुल 46 विधायक हैं। छोटे सहयोगी दलों (सपा 2 और माकपा 1) को जोड़कर आंकड़ा 49 तक पहुंचता है।
49 विधायकों के आधार पर MVA का एक सांसद राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन वह चेहरा कौन होगा-इस पर अभी तस्वीर साफ नहीं है।
चुनाव कार्यक्रम तय
राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 10 राज्यों में 16 मार्च को मतदान होगा। नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च, 6 मार्च को जांच और 9 मार्च तक नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी। 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान और शाम 5 बजे से मतगणना होगी।
सियासी संदेश क्या?
प्रियंका चतुर्वेदी ने भले ही दोबारा राज्यसभा जाने पर सीधा दावा नहीं किया हो, लेकिन उनके बयान से यह साफ है कि वे सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका जारी रखने को तैयार हैं। अब निगाहें MVA के अंतिम फैसले पर टिकी हैं-क्या उद्धव गुट उन्हें फिर मौका देगा या किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगा?





