मंदसौर, 04 जून (हि.स.)। मंगलवार से जून का महीना शुरू हो गया। पंडितों का मत है कि इस दौरान कई व्रत व त्योहारों की अधिकता रहेगी, साथ ही कई शुभ योगों का भी संयोग है। इन पर्वों पर आराधना व दान-पुण्य से कष्टों का निवारण होगा। सुहागिनों का त्योहार वट सावित्री अमावस्या और पूर्णिमा भी इसी माह में होगी। 13 व 14 जून को पुष्य नक्षत्र और 23 को अमृत सिद्धि योग रहेगा। इन योगों में खरीदारी फलदायी रहेगी। पं. उमेश जाशी ने बताया कि इस दौरान अनुष्ठान करने से विवाह में विलंब, ऋण और पारिवारिक विवाद समेत सभी कष्टों का निवारण हो सकता है। महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री का व्रत रखेगी। 6 जून – अपरा एकादशी- विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। विवाह शीघ्र होगा। विभिन्न दोषों से मुक्ति मिलेगी। 7 जून – सोम प्रदोष- भगवान शिव को जल अर्पित कर शिव चालीसा का पाठ करें। ब्राह्मणों को यथाशक्ति दान करें। रोगों से मुक्ति मिलेगी। 9 जून – वट सावित्री व्रत- वटवृक्ष का पूजन और काली उड़द का दान करने से ऋण मुक्ति होगी। 10 जून – स्नानदान अमावस्या और शनि जयंती- शनि मंदिर में तेल का दान करें। रोगों से मिलेगी मुक्ति। 13 – पुष्य नक्षत्र- आराध्य का पूजन करें, लाभ होगा। 14 जून – पुष्य नक्षत्र योग- शुभ-लाभ के चैघड़िया में विशेष खरीद परिवार में सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी करेगी। 16 जून – स्कंदषष्टी- शिव परिवार का अभिषेक और पूजन करें। पारिवारिक समस्याएं का जल्द समाधान होगा। 19 जून – महेश नवमी- शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा करने से धन लाभ होगा। परेशानियां दूर होंगी। 21 जून – निर्जलाध्भीमसेनी एकादशी और रुक्मिणी विवाह- भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें। एकादशी का व्रत रखें। आरोग्य की प्राप्ति होगी। 22 जून – भौम प्रदोष- वट सावित्री व्रत आरंभ। वटवृक्ष का पूजन कर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। 23 जून – अमृत सिद्धि योग- शुभ कार्य के लिए श्रेष्ठ। 24 जून – वट सावित्री व्रत(पूर्णिमा)- सौभाग्य प्राप्ति । 27 जून – संकष्टि चतुर्थी व्रत- भगवान गणेश का पूजन करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें। कष्टों से मुक्ति मिलेगी। हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलौया





