नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इंदौर की जनता चौपाल में वार्ड 84 की टीना गौड़ ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को सवालों की ऐसी झड़ी लगा दी कि पूरे आयोजन स्थल पर सन्नाटा छा गया। महिला ने नगर निगम के विकास कार्यों की गुणवत्ता, फिजूलखर्ची और प्रशासन की जवाबदेही पर सीधे सवाल उठाए, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
महापौर को असहज स्थिति में ला दिया
टीना ने महापौर से शुरूआत में ही सवाल किया कि महापौर के आने से सिर्फ 10 मिनट पहले ही सड़क का गड्ढा भरा गया, जबकि इससे पहले कई बुजुर्ग गिरकर चोटिल हो चुके थे। उन्होंने पूछा, क्या सड़क मरम्मत सिर्फ जनप्रतिनिधियों के आने पर ही की जाती है? आम जनता के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जाता? इस सवाल ने महापौर को असहज स्थिति में ला दिया।
”आज तो बोलने का पूरा हक है न सर”
महिला ने जनता चौपाल के समय और आयोजन की नियमितता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, चुनाव के बाद से जनता चौपाल क्यों नहीं हुई और आज क्यों रखी गई? महापौर ने जवाब दिया, आपको पता है, मैं कितनी बार द्वारकापुरी आया। लेकिन टीना ने तुरंत पलटवार किया, सर, आप आए, लेकिन जनता से रूबरू मिलने आए थे क्या? जब महापौर ने कहा, तो फिर क्या करने आया था? टीना ने निर्भीकता से कहा, आज तो बोलने का पूरा हक है न सर।
निगम के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर
सिर्फ सड़क ही नहीं, टीना ने पार्क, ब्लॉक और अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि अगर ब्लॉक और गार्डन पहले अच्छे थे, तो उन्हें क्यों खोदा गया। उन्होंने पूछा, “दीवारें तोड़ने की क्या जरूरत थी? निगम कर्ज में है, फिर भी यह फिजूलखर्ची क्यों?” उनके सवालों ने निगम के कामकाज और प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
”समस्याएं सुनें और जनता से रूबरू हों”
टीना ने टैक्स वृद्धि और आम जनता पर इसके प्रभाव को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि 2021 में टैक्स बढ़ाया गया और अब 2% और बढ़ा दिया गया, जिससे गरीब प्रभावित हुए हैं। उन्होंने निवेदन किया कि पार्षद घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनें और जनता से रूबरू हों।
लोग इसे लेकर चर्चा कर रहे हैं।
महिला के सीधे और बेबाक सवालों ने महापौर को जवाब देने के लिए मजबूर किया। उनकी बहादुरी और जागरूकता का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोग इसे लेकर चर्चा कर रहे हैं।
उदाहरण आम लोगों के लिए प्रेरणादायक
टीना गौड़ ने इंदौर की जनता चौपाल में नगर निगम के कामकाज, फिजूलखर्ची और प्रशासन की जवाबदेही पर सीधे वार करके सिस्टम की पोल खोल दी। यह घटना दिखाती है कि जागरूक नागरिक जब सामने आते हैं, तो प्रशासन को जवाब देना ही पड़ता है। जनता की आवाज़ दब नहीं सकती, और ऐसे उदाहरण आम लोगों के लिए प्रेरणादायक बनते हैं।





