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इंदौर को मिलेंगे नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन

-रालामंडल का होगा विकास, उमड़ीखेड़ा में बनेगा साइकिलिंग ट्रैक इंदौर, 30 जून (हि.स.)। रालामंडल और उमड़ीखेड़ा के रूप में इन्दौर को पूर्ण विकसित नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन मिलेंगे। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की पहल पर दोनों स्थानों को और विकसित करने के लिए योजना को ठोस रूप दिया जाएगा। बुधवार को मंत्री सिलावट के आमंत्रण पर वन मंत्री विजय शाह इंदौर पहुँचे और रालामंडल में प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रमुख सचिव वन अशोक वर्णवाल, संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा, कलेक्टर मनीष सिंह, मुख्य वन संरक्षक हरिशंकर मोहन्ता सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा इंदौर विकास प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष मधु वर्मा उपस्थित थे। बैठक में मंत्री सिलावट ने कहा कि रालामंडल इंदौर के लिए एक बड़ी धरोहर है। इसका संपूर्ण विकास किया जाना चाहिए। भोपाल में जिस तरह से वन विहार है, उसी तर्ज़ पर इसे विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में रालामंडल में उपलब्ध संसाधनों और संभावनाओं पर गहन विचार विमर्श किया गया। उन्होंने जोर दिया कि रालामंडल की परिधि में वन्य प्राणियों की संख्या बढ़ायी जाए। वन मंत्री विजय शाह ने कहा कि इसके लिए पानी के संसाधनों का निर्मित किया जाना बेहद ज़रूरी है। बैठक में मधु वर्मा ने कहा कि यहाँ लिम्बोदी तालाब अथवा नर्मदा-गंभीर लिंक से पानी की उपलब्धता बनायी जा सकती है। संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि वन विभाग मनरेगा के तहत तालाब बनाने पर भी विचार करें। प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल ने कहा कि रालामंडल एक वन्य अभ्यारण्य है। यहाँ पर अन्य स्थानों से हिरण लाये जा सकते हैं। इसके लिए इसकी होल्डिंग केपसिटी का आंकलन किया जाना ज़रूरी है। वन मंत्री शाह ने निर्देश दिए कि अन्य स्थानों से जहाँ वन्य प्राणी भटक कर आ जाते हैं उन्हें पकड़कर रालामंडल में छोड़ा जाए और एक प्रकार से यह ऐसे जानवरों की शरण स्थली के रूप में विकसित हो। बैठक में रालामंडल में वॉकिंग ट्रेल के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई। रालामंडल में चीता और तेंदुआ जैसे जानवरों को रखे जाने की संभावना पर भी विचार किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में यहाँ रालामंडल में वाकिंग-ट्रेल इंदौर वासियों के बीच लोकप्रिय है। और यहाँ बड़ी संख्या में नागरिक सप्ताहांत में ट्रेकिंग के लिए आते हैं। साथ ही पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित शिकार गृह तक जाकर शहर का नज़ारा देखते हैं। यहाँ चीता रखे जाने कि स्थिति में वॉकिंग ट्रेल बंद करना होगा, क्योंकि यह पर्यटकों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी होगा। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वॉकिंग ट्रेल बंद करने या चीता और तेंदुआ जैसे जानवरों को यहाँ रखे जाने के संबंध में इंदौर के नागरिकों और संस्थाओं का अभिमत भी प्राप्त किया जाए। कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि रालामंडल पहुँचने के मार्ग का सुदृढ़ीकरण बेहद ज़रूरी है। बैठक में तय हुआ कि बायपास से लेकर अब रालामंडल के द्वार तक रोड का चौड़ीकरण किया जाए और अतिक्रमण हटाया जाए। बायपास के निकट रालामंडल का एक आकर्षक स्वागत द्वार भी बनाया जाए। वन मंत्री ने चलाई जिप्सी वन मंत्री शाह ने बैठक के पहले मंत्री तुलसीराम सिलावट के साथ वन विभाग की जिप्सी में बैठकर रालामंडल के चारों तरफ़ की बाउंड्री का निरीक्षण किया। वन मंत्री ने इस दौरान ख़ुद जिप्सी चलायी। मंत्री सिलावट ने इस अवसर पर वन मंत्री को बताया कि 1985 के दौरान जब वे वन और पर्यटन विभाग से संबंधित संसदीय सचिव थे, तब उन्होंने प्रयास करके रालामंडल का नोटिफिकेशन कराया था और एक मूलभूत फ़ेंसिंग यहाँ कराई गई थी। मंत्रीद्वय ने बाईपास के निकट कुछ कालोनियों द्वारा अतिक्रमण के चिन्हांकन और इसे हटाए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक में देवगुराड़िया एवं रालामंडल के बीच रोपवे के संचालन पर भी चर्चा की गई और इस संबंध में आवश्यक प्रस्ताव और योजना बनाने के निर्देश दिए। बैठक में नाइट सफारी शीघ्र प्रारंभ किए जाने पर भी सहमति बनी। यहाँ बटरफ़्लाई पार्क भी विकसित किए जाने पर निर्णय लिया गया। रालामंडल के निकट स्थित वन विभाग के डिपो में यह बटरफ़्लाई पार्क बनाया जाएगा। जहाँ पर विभिन्न प्रजाति की तितलियों को संरक्षित किया जाएगा। मंत्रीद्वय ने बैठक में निर्देश दिया है कि रालामंडल एवं इसके नीचे की ज़मीनों को संरक्षित करते हुए इसके समग्र विकास का मास्टर प्लान बनाया जाए। अभ्यारण की बाउंड्री को भी सुदृढ़ीकरण करने के निर्देश दिए गए। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश

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