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शिकायतों पर आश्वासन बाद भी नहीं सुधरे हैंडपम्प और नलजल योजना

4620.91 लाख की योजनाओं के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में बरकरार पानी की समस्याएं अनूपपुर, 14 मई (हि.स.)। जिले में जलसंकट की समस्या से निपटने जल जीवन मिशन योजना के तहत घर घर नल कनेक्शन के माध्यम से पानी पहुंचाया जाना है। जिसमें गर्मी के दिनों में लगातार पानी की समस्या देखकर इससे निपटने जिला प्रशासन ने फरवरी माह में ही विभाग को हिदायत देते हुए बिगड़े हैंडपम्पों और नलजल योजनाओं के सुधार के निर्देश दिए थे। साथ ही प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि किसी भी हालत में ग्रामीण अचंलों में पानी परिवहन की व्यवस्था न बनाना पड़े। बावजदू जिले के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या बनी हुई है। गांव के हैंडपम्प सूखे हैं तथा नलजल योजनाएं बंद बेकार पड़ी है। अधिकारी बार बार सुधार की बात कह रहे हैं, लेकिन हालात यह है कि डेढ़ माह बाद भी विभाग द्वारा ऐसे गांवों का न तो सर्वे कराया जा सका और ना ही उन स्थानों पर पानी की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकी है। जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या बनी हुई है। बताया जाता है कि पीएचई विभाग द्वारा आगामी वर्ष में जलसंकट से निपटने के लिए 83 योजनाओं का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसके लिए लगभग 6727.9 लाख की मांग रखी है। जबकि वर्तमान सत्र में 64 योजनाओं के लिए विभाग ने 4620.91 लाख का प्रस्ताव रखा था। इसके तहत अनूपपुर, कोतमा, जैतहरी और पुष्पराजगढ़ के ऐसे स्थानों को चयनित किया गया, जहां पूर्व से नलजल योजनाएं या हैंडपम्प का अभाव था। लेकिन सारी योजनाएं पर अमल नहीं हो सका। विभागीय जानकारी के अनुसार वर्तमान में जलस्तर की कमी के कारण जिले में स्थापित 9793 हैंडपम्प में लगभग 150 हैंडपम्प में खराबी है, जबकि 168 नलजल योजनाओं में 9 बंद हैं। बंद पड़ी लाखों की योजनाओं में सुधार नहीं जैतहरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत रक्सा में लगभग 1275 की आबादी निवासरत है। यहां नल जल योजना 6 वर्षों से बंद पड़ी हुई है। विभाग द्वारा अबतक पंचायत को हस्तांतरित नहीं की गई है। योजना अधूरी है। जबकि कोतमा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत थानगांव में पिछले वर्ष 99 लाख की मुख्यमंत्री नल जल योजना के तहत पेयजल योजना स्वीकृत कर कार्य कराया गया था। लेकिन अभी तक कई वार्ड में पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाया है। कार्य अधूरे पड़े हैं। कोतमा के ही ग्राम पंचायत बहेराबांध में वर्ष 2020 में 40 लाख 93 हजार रुपए की लागत से नल जल योजना स्थापित की गई है। लेकिन ओवरहैंड टैंक और पाइप लाइन बिछाने के सालभर बाद भी अब तक पानी नहीं मिल पाया है। पुष्पराजगढ़ के बैगा जनजाति को अधिक परेशानी पुष्पराजगढ़ विकासखंड के अधिकांश हिस्सों में जहां बैगा आदिवासी जनजाति के लोग निवासरत हैं, उन क्षेत्रों में कभी विभाग द्वारा सर्वेक्षण का कार्य नहीं कराया गया है। जिसके कारण आज भी दर्जन से अधिक गांवों में कोई हैंडपम्प या नलजल योजना संचालित नहीं हो सकी है। यहां के परिवार आज भी आसपास के झिरिया या नदी-तालाब से पानी लाकर अपना जीवन गुजार रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

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