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सुप्रीम कोर्ट में विवाद के चलते भूमि अतिक्रमण की जांच में उलझा ग्रेसिम प्रबंधन

उज्जैन/नागदा, 15 जून (हि.स.)। मप्र के औद्योगिक नगर नागदा में करोड़ों की बेशकीमती भूमि के स्वामित्व को लेकर मप्र शासन एवं बिड़ला घराना के ग्रेसिम प्रबंधन के बीच सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन एक प्रकरण में नया मोड़ आया है। इस प्रकरण में मप्र शासन की और से प्रमुख सचिव राजस्व स्वयं पिटीशनर है। अब मुख्य सचिव मप्र शासन के पास शासकीय आधिपत्य की इस विवादित भूमि पर ग्रेसिम प्रबंधन नागदा द्धारा कथित अवैध अतिक्रमण करने की एक शिकायत पंजीकृत हुई। शिकायत के बाद जांच का निर्देश मप्र शासन राजस्व उपसचिव राजेश कुमार कौल ने कलेक्टर उज्जैन को दिया है। कलेक्टर ने जांच अनुविभागीय अधिकारी नागदा को सौंपी है। इधर, नागदा एसडीएम ने यह पूरी कार्यवाही के लिए तहसीलदार से प्रतिवेदन मांगा है। गौरतलब है कि सुपीम कोर्ट में यह याचिका एसएलपी क्रमांक 015837/ 2019 विचाराधीन है। हिंदुस्थान समाचार के पास जांच निर्देश से जुड़े दस्तावेज की प्रति एवं इस प्रकरण से जुड़े उच्चतम न्यायालय से संबधित सभी प्रमाण सुरक्षित है। कलेक्टर ने सौंपी जिम्मेदारी कलेक्टर उज्जैन ने यह जांच कार्यवाही अनुविभागीय अधिकारी राजस्व नागदा को सौंपी है। तीन दिनों में शिकायत के बिंदुओं पर अभिमत मांगा गया है। अनुविभागीय अधिकारी ने इस पर कार्यवाही करने के लिए तहसीलदार को अधिकृत कर प्रतिवेदन चाहा है। जांच निर्देश की पुष्टि की अनुविभागीय अधिकारी राजस्व आशुतोष गोस्वामी नागदा से दूरभाष पर संपर्क करने पर उन्होंने हिंदुस्थान समाचार संवाददाता से बातचीत में ग्रेसिम के खिलाफ कथित अवैध अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया जांच के लिए निर्देश पत्र कलेक्टर उज्जैन से प्राप्त हुआ है। जिस पर अब तहसीलदार से अभिमत मांगा गया है। इस शिकायत पर कार्यवाही प्रशासन ने यह कार्यवाही भारत सरकार रेलवे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य अभिषेक चोरसिया निवासी नागदा की शिकायत पर की है। चौरसिया ने यह शिकायत मप्र शासन के मुख्य सचिव इकबालसिंह बैस के कार्यालय में स्वयं उपस्थित होकर की थी। शिकायत में ये उठाए प्रश्न प्रमाणित प्रति के अनुसार गांव पाड़ल्या कला, मेहतवास की लगभग 195 हैक्टयर भूमि के स्वामित्व को लेकर यह विवाद सुप्रीम कोर्ट मे चल रहा है। यह भूमि बंद भारत कॉमर्स उद्योग की है। अब इस भूमि को लेकर विवाद मप्र शासन एवं ग्रेसिम प्रबंधन के बीच है। इस सारी भूमि पर तत्कालीन अपर कलेक्टर उज्जैन पवन जैन के एक आदेश 17 सितंबर 2014 के तहत शासन ने कब्जा किया है। तत्कालीन नागदा तहसीलदार ममता पटेल ने। भूमि को कब्जे में लेकर कार्यवाही को अंजाम दिया था यह भूमि ग्रेसिम उद्योग के नजदीक है। इसलिए ग्रेसिम प्रबंधन ने इस विवादित भूमि पर अपना कब्जा कर लिया और उसका उपयोग किया जा रहा है। यहां तक की अपने सुरक्षा कर्मचारियों का पहरा भी लगा रखा है। लगभग 18 हैक्टयर भूमि पर ग्रेसिम प्रबंधन ने अपना उत्पादन, गठाने, बारदाना आदि को रखकर अपने आधिपत्य में कर लिया है। इस भूमि पर कई आलीशान कोठिया भीं बनी हुई है। जिन में बंद भारत कामर्स उद्योग के अधिकारी निवास करते थे। इन कोठियां को ग्रेसिम प्रबंधन ने किराए पर दे दिया है। युकों बैंक को भी कोठिया किराए पर दे रखी है। इन कोठियों को लैँक्सेस उद्योग के अधिकारियों को किराया पर देने तथा ग्रेसिम प्रबंधन द्धारा राशि वसूलने का आरोप शिकायत में है। बिड़लाग्राम मार्केट में कई दुकानों को भी किराए पर दे दिया गया है, जबकि ये कोठियां शासन के कब्जे में है तो ग्रेसिम प्रबंधन को ऐसा करना कानूनन अपराध है। ग्रेसिम उद्योग प्रबंधन ने कई आवासीय मकान भी नपा की बिना अनुमति के बना लिए है। बिना अनुमति के निर्माण करने पर नपा ने कार्यवाही की है। ऐसी स्थिति में शासकीय आधिपत्य की इस भूमि पर इस प्रकार का उपयोग कर अतिक्रमण करना अपराध है। शिकायत पर उचित कार्यवाही की मांग की गई है। हिन्दुस्थान समाचार/ कैलाश सनोलिया/राजू

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