ग्रेसिम ने इंसाफ के लिए खटखटाया अदालत का दरवाजा

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नपा के अधिवक्ता 9 को अदालत में पेश करेंगे जवाब नागदा/उज्जैन, 07 अप्रैल (हि.स.)। जिले के औद्योगिक नगर नागदा में संचालित ग्रेसिम कंपनी कथित अवैध निर्माण को लेकर नपा द्वारा दिए गए नोटिस के बाद अब कंपनी आखिरकार अदालत की शरण में पहुंच चुकी है । निर्माण कार्य को बेदखल करने से बचने के लिए न्यायालय से स्टे मांगा है। न्यायालय में अगली पेशी 9 अप्रैल मुकर्रर हुई है। संभवत इस दिन नपा के अधिवक्ता अदालत में जवाब पेश करेंगे। ग्रेसिम ने यह कार्यवाही न्यायालय वर्ग-2 में की है। संबधितों को नोटिस भी जारी हो गए है। जिसमें कलेक्टर उज्जैन, नपा प्रशासक, नगरीय निकाय उज्जैन एवं सीएमओ नागदा को पार्टी बनाया गया है। प्रशासक ने की पुष्टि नपा प्रशासक आशुतोष गोस्वामी ने बुधवार को हिंदुस्थान समाचार एजेंसी संवाददाता से दूरभाष पर चर्चा में पुष्टि की है कि ग्रेसिम कंपनी ने न्यायालय में वाद दायर किया है। जिसका नोटिस प्राप्त हुआ है। नोटिस की प्रति नपा के अधिवक्ता रमेश चंदेल को दे दी गई है। अब वे उचित कार्यवाही करेंगे। क्या बनाया इश्यु नपा विधि-वेता रमेश चंदेल के अनुसार नोटिस का अध्ययन किया जा रहा है। आगामी 9 अप्रैल को नपा अपना पक्ष पेश करेगी। ग्रेसिम ने यह मामला उठाया है कि ग्रेसिम परिसर में निर्माण कार्य को लेकर नपा नागदा बार-बार नोटिस दे रही है, जबकि नपा एवं ग्रेसिम के बीच 1975 से एक अनुबंध चल रहा है। जिसके तहत औद्योगिक परिसर में निर्माण के लिए अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। ग्रेसिम ने स्टे भी मांगा है। विवाद की मूल जड़ प्रमाणि दस्तावेजों के अनुसार यह विवाद ग्रेसिम परिसर में निर्माणाधीन एक नि:स्त्राव प्रोजेक्ट को लेकर खड़ा हुआ था। जेएलडी नाम का यह प्रोजेक्ट उद्योग परिसर में एनजीटी के आदेश पर म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगरानी में अब अंतिम चरण में है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से एक बूंद भी उद्योग का प्रदूषित पानी बाहर नहीं छोडऩे की योजना है। बताया जा रहा है कि इजराइल की तकनीकी से यह प्रोजेक्ट 60 करोड़ की लागत से निर्माधाधीन है। रेल मंत्रालय भारत सरकार सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य अभिषेक चौरसिया ने यह मामला उठाया था कि प्रोजेक्ट का निर्माण एक अच्छी योजना है, लेकिन इसका विधिवत निर्माण सभी प्रकार की अनुमतियों के बाद होना चाहिए। नपा एवं सरकार के समक्ष सभी प्रकार के टैक्स जमा करने के पश्चात निर्माण होना चाहिए। जिससे जनता की तिजौरी में पैसा आए। इसी प्रकार से इस प्रोजेक्ट के निर्माण को तत्कालीन सीएमओ नागदा मो अशफाक खान ने अवैध निर्माण बताया था और न्यायालय में प्रकरण भी दायर किया था। जिसमें ग्रेसिम के यूनिट हेड समेत अन्य प्रबंधन को पार्टी बनाया गया था, लेकिन अपने स्थानांतरण के पहले सीएमआ अशफाक खान ने न्यायालय से यह प्रकरण उठाया लिया । उनका कहना थाकि ग्रसिम पर एक अनुबंध के तहत लाखो रूपए जो टैक्स बकाया था उसको ग्रेसिम कंपनी ने भर दिया था। इसलिए प्रकरण को वापस ले लिया। इस प्रकरण के दौरान समूचे प्रदेश में अवैध कॉलोनियों के निर्माण का मामला उठा और नागदा में कुछ लोगों के खिलाफ प्रकरण भी दर्ज हुए। अभिषेक चौरसिया ने यह इश्यू उठाया आम लोगों को कथित अवैध कॉलोनी निर्माण पर जेल भेजा गया। ग्रेसिम पर उन्होंने आरोप लगाया कि बिना अनुमति के बिड़लाग्राम में कॉलोनियों का निर्माण भी किया है। उच्च स्तर हुई यह शिकायत जांच के लिए नवागत सीएमओ भविष्य कुमार खोबागड़े के पास पहुंची थी। उन्होंन ग्रेसिम को कथित अवैध निर्माण के नोटिस जारी किए थे। सीएमओ ने नपा अधिनियम की धारा में उचित कार्यवाही की चेतावनी दी थी। जिसके बचाव के लिए ग्रेसिम प्रबंधन ने अब न्यायालय की शरण ली है तथा कार्यवाही के खिलाफ स्टे मांगा है। हिन्दुस्थान समाचार/कैलाश सनोलिया/राजू

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