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Saturday, March 7, 2026
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MP News: मप्र में धूमधाम से मनाया गया दशहरा, कहीं जले रावण- कुंभकर्ण- मेघनाथ के पुतले, तो कहीं हुई पूजा?

Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया गया। राजधानी भोपाल समेत प्रदेशभर में जगह-जगह असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की जीत का उत्साह देखने को मिला। रावण दहन देखने उमड़ी भीड़।

भोपाल, रफ्तार डेस्क (हि.स.)। मध्य प्रदेश में दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया गया। शाम को राजधानी भोपाल समेत प्रदेशभर में जगह-जगह असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म की जीत और बुराई के प्रतीक रावण, मेघनाद एवं कुंभकरण के पुतलों का दहन किया गया। साथ ही रंग-बिरंगी आतिशबाजी की गई। रावण दहन का नजारा देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

राजधानी भोपाल निकाली गई श्री राम की शोभायात्राएं

राजधानी भोपाल में मंगलवार शाम को कई जगह भगवान श्री राम की शोभायात्राएं निकाली गईं। इसके बाद कोलार बंजारी, बिट्टन मार्केट, भेल, छोला सहित दो दर्जन से अधिक मैदानों पर रावण, कुंभकर्ण, मेघनाथ के पुतलों का दहन किया गया। साथ ही रंग-बिरंगी आतिशबाजी की गई। शहर के उपनगर कोलार में 105 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। वहीं, शहर के सबसे पुराने छोला दशहरा मैदान पर 61 फीट सहित अन्य दशहरा मैदानों पर 20 से 51 फीट ऊंचे रावण, कुंभकर्ण, मेघनाथ के पुतलों का दहन किया। इसके अलावा कालोनियों में कई जगह रावण के अलग-अलग स्वरूपों का दहन हुआ।

इंदौर में हर्षोल्लास से मनाया गया विजयादशमी का पर्व

इंदौर में भी बुराई के प्रतीक रावण पर अच्छाई के स्वरूप मर्यादा पुरुषोत्तम राम की विजय का पर्व विजयादशमी हर्षोल्लास से मनाया गया। शहरभर में दशानन के दंभ का दहन हुआ। इंदौर में 150 से अधिक स्थानों पर रावण के पुतले का दहन किया गया। इसके बाद इंदौर का हर क्षेत्र जयश्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। इस बार रावण के साथ ही शूर्पणखा का पुतला भी जलाया गया। रावण दहन से पहले रंगारंग आतिशबाजी भी की गई। वहीं दशहरा पर शमी पूजन भी किया गया।

दशहरा मैदान बना था 111 फीट का रावण

शहर के दशहरा मैदान पर 111 फीट का रावण बनाया गया था। साथ ही 250 फीट लंबी लंका भी बनाई थी। रावण दहन से पहले भगवान राम की शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान रंगारंग आतिशबाजी भी हुई। आयोजन का यह 54वां वर्ष है। छावनी के उषागंज मैदान पर 51 फीट के रावण का दहन हुआ। पुतले का निर्माण हिंदू-मुस्लिम ने मिलकर किया था। दहन से पहले इलेक्ट्रानिक आतिशबाजी की गई। दहन का यह 38वां वर्ष है। तिलक नगर मैदान पर रावण दहन से पहले चल समारोह निकालकर शमी पूजन किया गया। शाम 5 बजे राम रथयात्रा गायत्री शक्तिपीठ प्रज्ञा संस्थान रवींद्र नगर से निकाली गई। रात को 51 फीट ऊंचे रावण और 101 फीट लंबी लंका का दहन किया गया। आयोजन का यह 62वां वर्ष है। विजय नगर चौराहे पर इस बार आतंकवादी रूपी रावण का दहन किया गया। यहां 61 फीट ऊंचा रावण बनाया गया थआ। दहन का कार्यक्रम पिछले 41 वर्ष से किया जा रहा है।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा

इसी तरह प्रदेश के अन्य शहरों में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया गया। गांवों में भी जगह-जगह रावण दहन किया गया। इस दौरान रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन कर आतिशबाजी की गई।

मध्य प्रदेश में ऐसी भी जगह, जहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता

मध्य प्रदेश में ऐसी भी जगह हैं, जहां रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है बल्कि वहां के लोग रावण का पूजन पाठ करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो लोग रावण की पूजा करके उनसे मन्नत मांगते हैं उनकी मनोकामान अवश्य पूरी होती है।

भाटखेड़ी गांव में रावण और कुंभकर्ण की है प्रतिमा

राजगढ़ जिले के भाटखेड़ी गांव में सड़क के किनारे रावण और कुंभकर्ण की प्रतिमा बनी हुई है। यहां के रहवासियों का मानना है कि ये रावण मन्नत पूर्ण करने वाला है। इसलिए ग्रामीण यहां नियमित पूजा अर्चना करते हैं। यहां आस-पास के गांव के लोग भी मन्नत मांगने के लिए आते हैं। मन्नत पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाया जाता है। शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां पर नौ दिन तक रामलीला का आयोजन किया जाता है और दशहरे के दिन रावण की पूजा अर्चना कर राम और रावण के पात्रों द्वारा भाला छुआ कर गांव और जनकल्याण की खुशी के लिए मन्नत मांगी जाती है।

यहां होती है रावण की पूजा

रावण की पत्नी मंदोदरी मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से मानी जाती है। ऐसे में यहां रावण को दामाद माना जाता है और उसे सम्मान के साथ रावण बाबा बोला जाता है। दशहरे दिन यहां रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता है, बल्कि इस दिन रावण की नाभि में रुई में तेल लेकर लगाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से उनकी नाभि में लगे तीर का दर्द कम हो जाता है। इस दिन लोग रावण की पूजा करके उनसे विश्वकल्याण और गांव की खुशहाली के लिए मन्नत मांगते हैं।

काचिखली गांव में होती है रावण की पूजा

उज्जैन जिले के काचिखली गांव में भी दशहरे के दिन रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता है। बल्कि इस दिन यहां रावण की पूजा की जाती है। यहां के बारे में ऐसी मान्यता है कि यदि रावण की पूजा नहीं की जाएगी तो गांव जलकर राख हो जाएगा। इसी डर से ग्रामीण यहां पर आज भी दशहरे के दिन रावण का दहन न करके उसकी मूर्ति की पूजा करते हैं।

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