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भरतवंशियों ने पूरे विश्व को योग रूपी अमोघकारी अस्त्र प्रदान किया हैं: सविता तिवारी

अनूपपुर, 30 जून (हि.स.)। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में योग संकाय एवं योग विभाग द्वारा 7वें विश्व योग दिवस पर कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए योग और पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला एवं योग पखवाड़ा का आयोजन किया गया, जिसका समापन बुधवार को हुआ। इस दौरान कई वक्ताओं ने अपने विचार रखें। सोशल मिडिया के माध्यम से 1766 लोग भाग लिया। विशिष्ट अतिथि भारतीय संस्कृति एवं योग के प्रचार-प्रसार हेतु कार्यरत वरिष्ट पत्रकार एवं भारत मॉरीशस डिजिटल प्लेटफॉर्म की संस्थापक सविता तिवारी ने कहा कि भरतवंशियों ने पूरे विश्व समुदाय को योग रूपी अमोघकारी अस्त्र प्रदान किया है जो मानव मात्र के आंतरिक एवं बाह्य रूप से जीवन को सुव्यवस्थित करता है। उन्होंने योग एवं पारंपरिक चिकित्सा पद्यतियों के महत्व के बारे में बताते हुए नियमित रूप से योगासन एवं योगिक क्रियाओं का अभ्यास करने के लिए कहा। डॉ. आईव्ही बसवारेड्डी, निदेशक, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, दिल्ली, ने योग के उद्भव एवं विकास को बताते हुये शिव एवं पार्वती के योग संवाद, सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर वैदिक काल एवं अन्य कालो में भी योग के उत्कर्ष वेयम विकास, योग के मूल तत्वों के साथ योग वशिष्ट एवं पतंजलि योग सूत्र ग्रंथों का उल्लेख करते हुये मन के नियंत्रण के उपायों को बताया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में योग अपनी विश्थ्तोन के कारण पूरे विश्व मे अपने को स्थापित किया है डॉ. बसवारेड्डी ने सांख्य दर्शन एवं योग दर्शन को जीवन दर्शन एवं जीवन साध्य की बात करते हुये चित्त एवं चित्त की अवस्थाओं को बताते हये चित्त को साधने के लिए अभ्यास एवं वैराग्य ,तंत्र शास्त्र एवं जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म के तार्किक शब्दो की बारीकी बताई। अध्यक्षता कर रहें इगांराजवि, अमरकंटक के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाशमणि त्रिपाठी ने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के योगांग पूरी दुनिया के लिए वरदान सिद्ध हुई है। पूरी दुनिया ने योग को अपना कर अपना समग्र विकास किया है। कोरोना ने इस भारतीय विद्या एवं हमारे ऋषि मुनियों के ज्ञान को एक बार पुन: लोकोपयोगी सिद्ध किया है। कोरोना काल मे शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक रूप से लोगो को मजबूत किया है। एवं भरोसा पैदा किया है। आहार चिकित्सा,प्राकृतिक चिकित्सा एवं आयुर्वेद चिकित्सा,विश्व योग दिवस के प्रतीक चिन्ह को भी बताया कि विश्व योग दिवस का प्रतीक चिन्ह भौमिक चेतना के साथ योग को प्रतिविम्बित करता है। संकायाध्यक्ष एवं आयोजन समिति के निदेशक प्रो. आलोक श्रोत्रिय ने कहा कि योग समग्र जीवन दर्शन है और इसे अपने आचरण एवं व्यवहार में शामिल करने वाला व्यक्ति मानव से महामानव बन सकता है। डॉ हरेराम पाण्डेय प्रो. जितेंद्र शर्मा,डॉ ऐ जेना, कुलसचिव सिमुलैयनाथन,जन संपर्क अधिकारी प्रो. मनीषा शर्मा, डॉ प्रवीण कुमार गुप्ता, डॉ श्याम सुंदर पाल, डॉ संदीप ठाकरे, डॉ नीलम श्रीवास्तव, अरविंद गौतम, गुरुनाथ करनाल एवं विवेक नेगी शामिल रहे। हिन्दुस्थान समाचार/ राजेश शुक्ला

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