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Friday, April 3, 2026
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कर्नाटक सरकार का फैसला! रमजान में उर्दू स्कूलों का समय बदलेगा, आदेश किया जारी

कर्नाटक सरकार ने रमजान के दौरान राज्य के सभी उर्दू माध्यम स्कूलों के समय में बदलाव करने का फैसला किया है, जो 20 मार्च 2026 तक लागू रहेगा।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । कर्नाटक सरकार ने रमजान के महीने के दौरान राज्य के उर्दू माध्यम स्कूलों के समय में बदलाव करने का निर्णय लिया है। यह बदलाव प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों में लागू होंगे। गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने कहा है कि इस कदम को अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण कहना सही नहीं होगा। सरकार ने एक परिपत्र जारी कर कहा कि यह आदेश सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त उर्दू स्कूलों पर लागू होगा। फैसला मौजूदा नियमों की समीक्षा और कर्नाटक राज्य प्राथमिक विद्यालय शिक्षा संघ (आर), बेंगलुरु के अभ्यावेदन के आधार पर लिया गया है।

सोमवार को सार्वजनिक 30 जनवरी के परिपत्र में कहा गया कि 31 अक्टूबर, 2002 के स्थायी आदेश के तहत राज्य के उर्दू माध्यम निम्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों को सुबह 8 बजे से दोपहर 12.45 बजे तक कक्षाएं संचालित करने की अनुमति दी गई थी। परिपत्र में स्कूलों को नियमों की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया।

सरकार ने 8 मार्च, 2023 के अपने आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें शैक्षणिक वर्ष 2023-24 के लिए राज्य पाठ्यक्रम पालन करने वाले स्कूलों के नियमित घंटे सुबह 10 बजे से शाम 4.20 बजे तक निर्धारित किए गए थे। हालांकि, रमजान और उर्दू माध्यम संस्थानों के लिए लंबे समय से चले आ रहे विशेष प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 17 जनवरी, 2026 को एसोसिएशन के अध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन के बाद इस मामले की नए सिरे से समीक्षा की।

बदलाव का आदेश जारी

कर्नाटक सरकार ने आदेश दिया है कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त उर्दू माध्यम के निम्न प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालयों के समय में बदलाव रमजान की शुरुआत से 20 मार्च 2026 तक लागू होगा।

गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इस कदम को उचित ठहराते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उर्दू माध्यम के बच्चों को अन्य बच्चों के बराबर लाना है। उन्होंने आगे कहा, “यदि कोई वर्ग समाज में पूरी तरह से बराबर नहीं है, तभी संविधान ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किए। हमारा लक्ष्य सभी को समान अवसर देना और समतावादी समाज का निर्माण करना है।” परमेश्वर ने बताया कि यह समय बदलाव सरकार की ओर से एक छोटा प्रोत्साहन है। उन्होंने स्पष्ट किया, “यदि इसे स्वीकार नहीं किया जाता, तो इसका मतलब होगा कि आप लोगों के साथ समान व्यवहार के खिलाफ हैं।

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