back to top
34.1 C
New Delhi
Thursday, March 12, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

कर्नाटक कांग्रेस में तनाव: CM पद की रेस में शिवकुमार सक्रिय, लेकिन खरगे से दूरी बनी रही

कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच खींचतान तेज हो गई है। डीके ने कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात से इनकार कर नागा साधु का आशीर्वाद लिया।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कर्नाटक कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रहा सियासी संग्राम अब बगावत की हद तक पहुँच गया है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने की अपनी इच्छा पर अड़े हुए हैं, जबकि वर्तमान सीएम सिद्धारमैया कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इस खींचतान के बीच, हाई कमान पर जल्द कोई फैसला लेने का भारी दबाव है।सबसे बड़ा राजनीतिक ड्रामा तब देखने को मिला जब शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करने से इनकार कर दिया, जबकि उनके घर पर उन्हें सीएम बनने का आशीर्वाद देने के लिए नागा साधु पहुंचे। 

डीके शिवकुमार को नागा साधु का ‘सीएम’ बनने का आशीर्वाद

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में सियासी उथल-पुथल के बीच एक हैरान कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया। डीके शिवकुमार के आवास पर कुछ नागा साधु पहुंचे, जिन्होंने उन्हें सीएम बनने का आशीर्वाद दिया। साधुओं में से एक ने डीके शिवकुमार से कहा कि वह काशी से आए हैं और उन्होंने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनने का आशीर्वाद दिया, जिससे राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा और भी तेज हो गई है।

खरगे से मुलाकात से इनकार: हाई कमान पर दबाव

डीके शिवकुमार की नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि उन्होंने खुद बेंगलुरु पहुंचे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात नहीं की, जिससे हाई कमान पर दबाव बढ़ गया है।इस पूरे मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए चुप्पी साधे रखी। उन्होंने कहा, “मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। जो भी फैसला होगा, हाई कमान ही करेगा। आप लोग व्यर्थ परेशान न हों, इससे मुझे भी पीड़ा हो रही है।” उनका यह बयान मौजूदा संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

 ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज बने मध्यस्थ

इस सियासी संकट को सुलझाने में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज ने रविवार को मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई। उन्होंने एक के बाद एक तीन महत्वपूर्ण बैठकें कीं। सबसे पहले जॉर्ज ने सीएम सिद्धारमैया से मुलाकात की।इसके बाद वह कांग्रेस अध्यक्ष खरगे से मिले।आखिर में शाम को डीके शिवकुमार ने खुद जॉर्ज के घर जाकर उनसे लगभग एक घंटे तक मुलाकात की।

सूत्रों के अनुसार, जॉर्ज ने पार्टी की ओर से शिवकुमार को धैर्य रखने और मार्च में पेश होने वाले बजट तक शांत रहने को कहा। जवाब में, डीके शिवकुमार ने पार्टी से ठोस आश्वासन मांगा है, जिससे यह साफ है कि वह बिना किसी गारंटी के पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कर्नाटक में यह सत्ता संघर्ष अब पूरी तरह से कांग्रेस आलाकमान के पाले में है, और शिवकुमार की यह नाराजगी जल्द ही कोई बड़ा फैसला लेने को मजबूर कर सकती है।

कर्नाटक कांग्रेस में सीएम पद को लेकर जो खींचतान आज बगावत के स्तर पर पहुंच गई है, उसकी नींव 2023 के विधानसभा चुनाव परिणाम के तुरंत बाद ही पड़ गई थी। मई 2023 में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद, कांग्रेस पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती खुशी मनाना नहीं, बल्कि दो सबसे बड़े नेताओं सिद्धारमैया और डीके शिवकुमारके बीच कुर्सी का फैसला करना था।आइए जानते हैं, 2023 में यह विवाद कब और कैसे शुरू हुआ था, और तब इसे किस तरह संभाला गया था। 

प्रचंड जीत के बाद शुरू हुआ विवाद (मई 2023)

13 मई 2023 को कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, जिसमें कांग्रेस ने 135 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत हासिल किया। जीत की खुशी जल्द ही सीएम पद को लेकर तनाव में बदल गई। उन्होंने खुद को जन नेता (Mass Leader) और पूर्व मुख्यमंत्री होने के आधार पर दावा ठोका। उनके पास अधिकांश विधायकों का समर्थन था, जो उन्हें प्रशासनिक अनुभव के साथ एक मजबूत दावेदार बनाता था।उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दावा किया। उनका तर्क था कि,उन्होंने ही राज्य में पार्टी को संगठित किया, चुनाव के लिए धन जुटाया, और विपरीत परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं को एकजुट रखा, इसलिए उन्हें इनाम मिलना चाहिए।

हाई कमान के सामने 5 दिन का हाई वोल्टेज ड्रामा

नतीजे आने के बाद लगभग पांच दिनों तक दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के सामने हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। दोनों ही नेता अपने समर्थकों के साथ दिल्ली पहुंचे और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से लगातार मुलाकातें कीं।दोनों ने पद छोड़ने से इनकार कर दिया, जिससे हाई कमान के लिए फैसला लेना मुश्किल हो गया। यह साफ हो गया था कि किसी एक को दरकिनार करने से राज्य में पार्टी टूट सकती है।लंबी बातचीत और मंथन के बाद, पार्टी ने एक ‘बीच का रास्ता निकाला।

 ‘2.5 साल के फार्मूले’ पर बनी थी सहमति

18 मई 2023 को हाई कमान ने अंततः सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की घोषणा की। हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने सार्वजनिक रूप से इसका खंडन किया था, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह बात जोर पकड़ रही थी कि दोनों नेताओं के बीच ढाई-ढाई साल के लिए सत्ता साझा करने का एक अघोषित समझौता हुआ था।

यह अघोषित समझौता ही वर्तमान विवाद की जड़ है। अब जब सिद्धारमैया ने अपनी 2.5 साल की अवधि पूरी कर ली है या करने वाले हैं, तो शिवकुमार खेमा चाहता है कि समझौते का पालन किया जाए, जबकि सिद्धारमैया खेमा इस तरह के किसी भी समझौते के अस्तित्व को नकार रहा है।

Advertisementspot_img

Also Read:

कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन पर CM सिद्धारमैया की दो टूक, बोले- ‘हाईकमान जो कहेगा वही मानूंगा’

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।...
spot_img

Latest Stories

LPG Cylinder Consumption: देश के किन राज्यों में होती है LPG की सबसे ज्यादा खपत, जानिए टॉप- 5 राज्य

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और...

2027 चुनाव से पहले पश्चिमी UP पर सपा का फोकस, दादरी से अखिलेश यादव शुरू करेंगे अभियान

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा...

Share Market Today: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, 873 अंक टूटा Sensex, Nifty भी 254 अंक फिसला

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार...

डोनाल्ड ट्रंप का Section 301: क्या है ये कानून, जिससे भारत-चीन सहित 16 देशों पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। अमेरिका में Donald Trump प्रशासन ने...

20 साल से इसी दिन का इंतजार था: कौन है कमल सिंह जामवाल? जिसने फारूक अब्दुल्ला पर तान दी बंदूक

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल...