देश से भागने के लिए प्रज्वल रेवन्ना को क्यों नहीं लेना पड़ा जर्मनी का वीज़ा? ये है कारण

प्रज्वल रेवन्ना के पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट है, जिसे कोर्ट के आदेश के बिना खारिज करने से विदेश मंत्रालय ने इनकार कर दिया है।
Prajwal Revanna Diplomatic Passport
Prajwal Revanna Diplomatic PassportFile

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। जनता दल सेक्यूलर के सांसद प्रज्वल रेवन्ना पर कई महिलाओं के यौन शोषण का आरोप लगा है। मामला तूल पकड़ने से पहले ही प्रज्वल रेवन्ना आनन-फानन में जर्मनी फरार हो गए। जर्मनी जाने के लिए प्रज्वल को वीज़ा लेने की ज़रूरत नहीं पड़ी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सांसद होने के नाते प्रज्वल के पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट था। भारत की जर्मनी के साथ संधि है जिसके चलते भारत के डिप्लोमैटिक पासपोर्ट धारक बिना वीज़ा के जर्मनी जा सकते हैं।

कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार से प्रज्वल का डिप्लोमैटिक पासपोर्ट रद्द करने की मांग की थी। जिस पर विदेश मंत्रालय का कहना है कि डिप्लोमैटिक पासपोर्ट तब तक रद्द नहीं किया जा सकता जब तक कि अदालत का आदेश न हो।

क्या होता है डिप्लोमैटिक पासपोर्ट?

जैसा कि नाम से ही जाहिर है। डिप्लोमैटिक पासपोर्ट ऐसे भारतीय नागरिकों को जारी होता है जो सरकारी कामकाज के लिए विदेश जाते हैं। विदेश सेवा के अफसरों, विदेशी हाई कमीशन और दूतावासों में तैनात भारतीयों को डिप्लोमैटिक पासपोर्ट दिया जाता है। नॉर्मल पासपोर्ट का कवर गहरा नीले रंग का होता है और इनकी वैधता 10 साल होती है। लेकिन डिप्लोमैटिक पासपोर्ट का कवर मरून रंग का होता है और इसकी वैधता 5 साल या उससे कम होती है।

किस को मिल सकता है यह पास्टपोर्ट ?

विदेश मंत्रालय के अनुसार डिप्लोमैटिक पासपोर्ट उन लोगों को मिलता है जो सरकार की तरफ से विदेश भेजे जाते हैं। जिनका स्टेटस डिप्लोमैटिक होता है। इंडियन फॉरन सर्विस के अंतर्गत काम करने वाले अफ्सरों को भी यह मिलता है। इसके अलावा डिप्लोमैटिक पासपोर्ट उन लोगों को भी दिया जाता है जो सरकार के कहने पर विदेश में देश की तरफ से जाते हैं। इसमें क्रेंदीय मंत्री भी शामिल होते है, इसके साथ ही अगर किसी सांसद को सरकारी काम से विदेश जाना पड़े तो उनके लिए भी डिप्लोमैटिक पासपोर्ट जारी किया जाता है। इस केस में पासपोर्ट की वैधता संसद में सदस्यता होने तक ही रहती है।

प्रज्वल को वीजा की जरूरत क्यों नहीं पड़ी ?

आमतौर पर विदेश मंत्रालय जब किसी अफसर को विदेश भेजता है तो उसके लिए वीजा नोट जारी किया जाता है। लेकिन प्रज्वल के मामले में ऐसा कोई नोट जारी नहीं हुआ। विदेश मंत्रालय के रणधीर जयसवाल ने बताया कि प्रज्वल के जर्मनी जाने के लिए न तो कोई वीजा नोट मांगा गया और न ही किसी पॉलिटिकल क्लीयरेंस की जरूरत पड़ी।

प्रज्वल का शातिर दिमाग

दरअसल जर्मनी उन 34 देशों में से एक है, जिसकी भारत के साथ विशेष संधि है। इस संधि के तहत डिप्लोमैटिक पासपोर्ट धारकों को बिना वीज़ा के जर्मनी में एंट्री मिल जाती है। 2011 में तय हुए एक नियम के तहत, डिप्लोमैटिक पासपोर्ट होल्डर बिना वीज़ा के 90 दिन तक जर्मनी में रह सकते हैं। भारत की इसी तरह की संधि फ्रांस, ऑस्ट्रिया, अफगानिस्तान, इटली, ईरान के साथ भी है।

क्या कहता है पासपोर्ट अधिनियम

पासपोर्ट को केवल पासपोर्ट अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ही रद्द किया जा सकता है। इसके अनुसार, पासपोर्ट रद्द करने के लिए कोर्ट आदेश जरूरी है। बिना कोर्ट का आदेश हुए इसे रद्द नहीं किया जा सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमारे पास अभी तक इस संबंध में कोई कोर्ट का निर्देश नहीं आया है।

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