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पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से जारी प्रमाण पत्र पर नहीं था साईं हेल्थ केयर अस्पताल का नाम

-साईं हेल्थ केयर पर हुई कार्रवाई की रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय भेजी गई रामगढ़, 27 मई (हि.स.)। रामगढ़ शहर के थाना चौक पर स्थित साईं हेल्थ केयर अस्पताल जिस तरह कोरोना के नाम पर मरीजों को लूट रहा था, उसी तरह वह स्वास्थ्य विभाग को भी बेवकूफ बना रहा था। इस बात का खुलासा तब हुआ जब सिविल सर्जन डॉ गीता सिन्हा मानकी ने उस अस्पताल के खिलाफ हुई जांच की रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी। स्वास्थ्य मंत्री को भेजी गई रिपोर्ट में सिविल सर्जन ने लिखा है कि जांच के दौरान साईं हेल्थ केयर अस्पताल प्रबंधन ने पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के द्वारा जारी एक सर्टिफिकेट भी टीम के समक्ष प्रस्तुत किया था लेकिन वह सर्टिफिकेट किस अस्पताल या संस्थान के नाम पर जारी है यह उसमें अंकित नहीं था। इससे साफ है कि अस्पताल फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे संचालित हो रहा था। सिविल सर्जन ने स्वास्थ्य मंत्री को इस बात से भी अवगत कराया है कि उस अस्पताल का निबंधन रद्द कर दिया गया है लेकिन सवाल यह है कि शहर के मुख्य चौक पर स्वास्थ्य विभाग के नाक के नीचे एक अस्पताल सिर्फ मरीजों को लूटने के लिए चल रहा था। इसका पता विभाग के किसी भी पदाधिकारी या कर्मचारी को नहीं था। कोविड-19 से ग्रसित मरीज द्वारिका नाथ का ईलाज के क्रम में अधिक राशि वसूली करने की शिकायत पर स्वास्थ्य मंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। जांच टीम में सिविल सर्जन के साथ सदर अस्पताल के कार्यकारी उपाधीक्षक डॉ उदय श्रीवास्तव, एसडीपीओ किशोर कुमार रजक, सदर अस्पताल के अस्पताल प्रबंधक अतिंदर उपाध्याय भी शामिल थे। जांच दल द्वारा मरीज द्वारिका नाथ, को ईलाज में हुए खर्च व भुगतान से संबंधित विपत्र का अवलोकन किया गया। विपत्र की कुल राशि 195160 रुपए थी। सिविल सर्जन द्वारा अस्पताल प्रबंधक को निर्देशित किया गया है कि विपत्र की राशि अत्यधिक है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन के अनुसार साई हेल्थ केयर अस्पताल दवाईयां एवं उपचार सभी को मिलाकर 11 दिन के लिए 89 हजार रुपये का भुगतान मरीज के द्वारा किया जा सकता है। अस्पताल प्रबंधन ने ₹195160 का बिल दिया। इसमें से ₹20000 का डिस्काउंट किया गया था। मरीज के परिजनों के द्वारा 175060 रुपये का भुगतान किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने जिला प्रशासन के निर्देश पर गलत तरीके से वसूली गई रकम को परिजनों को सौंपा है। लेकिन उसकी इस हरकत की वजह से स्वास्थ्य विभाग ने उस अस्पताल का निबंधन रद्द कर दिया है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की सजगता की वजह से रामगढ़ में मरीजों को लूटने वाले अस्पताल का पर्दाफाश हो सका है। अगर स्वास्थ्य मंत्री ने इसे गंभीरता से ना लिया होता तो मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही मरीजों को लूटने का सिलसिला जारी रहता। हिन्दुस्थान समाचार/अमितेश

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