–कोरोना बंदी का सबसे अधिक दुष्प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पर खूंटी, 24 जून(हि. स.)। कोरोना संक्रमण इस दौर में स्कूल, काॅलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के बंद रहने का सबसे अधिक बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। कोरोना लाॅकडाउन का सबसे बुरा प्रभाव पड़ है तो वे हैं ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे। शहर के बच्चे तो प्राइवेट ट्यूशन और आॅनलाइन पढ़ाई के जरिये अपने पाठ्यक्रम पूरा कर ले रहे हैं, पर सुदूर गांव-देहात में रहने वाले बच्चे करें, तो क्या करें? न गांव के अधिकतर लोगों के पास न तो मोबाइल है और न ही ढंग का नेटवर्क। बच्चों के अभिभावक भी न इतने शिक्षित हैं और न ही आर्थिक रूप से मजबूत कि वे अपने बच्चों को महंगे मोबाइल खरीद कर दे सकें। यही कारण हैे कि बच्चे पढ़ाई-लिखाई के बदले अपने घरेलू काम में समय बीताते हैं। कहीं बच्चे सड़क किनारे या साप्ताहिक हाट में आम बेचतेे, तो कहीं रूगड़ा- खुखड़ी बेचते नजर आ जाते हैं। रहा समय घर का काम करने अथवा बैल-बकरी चराने में जाया हो रहा है। रात को बच्चे पढ़ना भी चाहते हैं, तो बिजली बड़ी बाधा बनकर खड़ी हो जाती है। इस संबंध में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल




