नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। चंपई सोरेन ने अभी कुछ दिनो पहले झारखंड के नए मुख्यमंत्री के रूप में ली। उनके शपथ लेने के साथ ही जेएमएम पार्टी के अंदर बगावत के सुर भी सुनाई देने लगे। ऐसा माना जा रहा है कि दो विधायक आलाकमान से खुश नहीं है। वहीं चंपई सोरेन ने पार्टी को टूट फूट से बचाने के लिए 39 विधायकों को हैदराबाद के एक रिसॉर्ट भेज दिया गया है। आपको बता दें कि जेएमएम पार्टी के जो विधायक चंपई सोरेन को सीएम बनाने के पक्ष में नहीं थे। उनका नाम लेबिन हेंब्रम और चमरा लिंडा है। सूत्रों की माने तो ये दोनो विधायक शुरू से ही चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं थे। वहीं बचे हुए विधायको को दो दिन बाद यानी पांच फरवरी को वापस रांची लाया जाएगा। उसी दिन नई सरकार को बहुमत भी साबित करना होगा।
क्या चंपई सोरेन बहुमत साबित कर पाएंगे?
जमीन घोटाले और मनी लांड्रिंग के मामले में ईडी ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद से राज्य में सियासी उबाल देखने को मिला। ऐसे में सवाल यह था कि नया मुख्यमंत्री कौन बनेगा। हेमंत की गिरफ्तारी से पहले विधायक दल की बैठक में साफ हो गया था कि चंपई सोरेन ही सीएम होंगे। जबकि रेस में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी थी। तमाम उठापटक के बीच शुक्रवार को आखिरकार चंपई सोरेन ने झारखंड के 12वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही आलमगीर आलम और सत्यानंद भोक्ता ने मंत्री के रूप में शपथ ली। आपको बता दें कि झारखंड के राज्यपाल ने नए सीएम को बहुमत साबित करने का दस दिन का समय दिया है। लेकिन सवाल यह है कि विधायको के बगावती सुर को देखते हुए क्या यह संभव है।
विधायको को रिजॉर्ट क्यों भेजा गया?
विधायको को रिजॉर्ट में ठहरने की पॉलिटिक्स किसी सरकार की नई नहीं है। देश के अलग अलग राज्यों में जब भी विधायकों के दूसरी पार्टी में शामिल होने की सुगबुगाहट देखी जाती हैं तो आलाकमान यहीं पैंतरा अपनाता है। जो चंपई सोरेन ने अपनाया है। दरअसल जिस तरह से जेएमएम के दो विधायको ने नई सरकार के खिलाफ बगावती सुर अपनाया है। उसके बाद नए सीएम ने झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के 39 विधायको को हैदराबाद के एक रिजॉर्ट में भेज दिया गया है। तेलंगाना सरकार ने इन विधायकों को ठहराने का इंतजाम किया है
अन्य खबरों के लिए क्लिक करें- Hindi News Today: ताज़ा खबरें, Latest News in Hindi, हिन्दी समाचार, आज का राशिफल, Raftaar – रफ्तार:




