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Wednesday, April 1, 2026
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नई शिक्षा नीति उर्दू को खत्म करने की साजिश:मुफ्ती सोहेल

पाकुड़, 01 मार्च(हि.स.)। केन्द्र सरकार नई शिक्षा नीति की आड़ में उर्दू को खत्म करने की साजिश कर रही है। इसमें उर्दू जुबान की कोई गुंजाइश ही नहीं है। ये बातें सोमवार को स्थानीय हाटपाड़ा मरकज में ‘शिक्षा व उर्दू जुबान की रक्षा ‘ विषय पर आयोजित आम सभा को संबोधित करते हुए इमारत ए शरीया के सह संयोजक मुफ्ती सोहेल अख्तर ने कहीं। इसका आयोजन इमारत ए शरीया बिहार, झारखंड व ओड़िसा द्वारा किया गया था। मौलाना अंजर कासमी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में मुफ़्ती सईद असद कासमी, आसनसोल भी मौजूद थे। आयोजन के मकसद के मद्देनजर मुफ़्ती सईद असद ने कहा कि आज के बदलते हालत और हुकूमत ए हिन्द की नई शिक्षा नीति को देखते हुए इमारत ए शरिया के संयोजक मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी द्वारा बिहार, ओड़िसा और झारखण्ड में शिक्षा और उर्दू जुबान की रक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हासिल करना जरूरी है। बगैर शिक्षा इंसान की जिंदगी का कोई मायने नहीं है। इस्लाम में शिक्षा ग्रहण करना जरूरी बताया गया है। शिक्षा ग्रहण से मतलब सिर्फ मजहबी शिक्षा ही नहीं, बल्कि दुनिया की दूसरी जुबान की भी शिक्षा हासिल करना है। उन्होंने कहा कि झारखंड के सभी जिलों में जागरूकता अभियान के तहत आम सभा आयोजित किया जा रहा है।वहीं मुफ़्ती मोहम्मद सोहेल अख्तर ने कहा कि अपने बच्चों को शिक्षित बनाएँ।उन्हें मजहबी किताबों की शिक्षा के अलावा हिन्दी, इंग्लिश समेत सभी जुबान में महारत हासिल कराना बेहद जरूरी है।साथ ही कहा कि सरकार जो नई शिक्षा नीति आगामी अप्रैल से नई शिक्षा नीति के तहत हमारे बच्चों को इसी शिक्षा दी जाएगी जिसमें उर्दू का कोई जिक्र ही नहीं है।उन्होंने कहा कि नई नीति के तहत उर्दू के साथ सौतेला व्यवहार की बू आ रही है।साथ ही कहा कि कानून ने हमें शिक्षा का अधिकार दिया है। लेकिन सरकार मदरसा व मकतबों में शिक्षा ग्रहण करने वालों को साक्षर मानने को तैयार नहीं। इमारत ए शरिया ने अभियान चला कर दिनी और दुनियाबी शिक्षा पर जोर दिया है।जबकि मौलाना अंजर कासमी ने कहा कि हमारे मजहब की किताबें उर्दू जुबान में हैं। जब लोग उर्दू पढ़ेंगे ही नहीं तो अपने मजहब को कैसे जान पाएँगे।नई शिक्षा नीति हमारी आने वाली नस्ल को बर्बाद कर देगी।उन्होंने जोर देकर कहा उर्दू एक जुबान ही नहीं हमारी सभ्यता की पहचान भी है। जो दुनिया के सभी हिस्से में बोली और पढ़ी जाती है। इस कार्यक्रम का मक़सद अपने दीन की हिफाजत के साथ उर्दू की रक्षा व तरक़्क़ी के लिए लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने आने वाली नस्लों के लिए मदरसे व मकतब बनाएं। हिन्दुस्थान समाचार/ रवि

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