नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । झारखंड विधानसभा चुनावों में निर्णायक जीत दर्ज करने के बाद हेमंत सोरेन 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। दरअसल, हेमंत सोरेन के झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व वाले गठबंधन ने चुनावों में जीत हासिल की जिससे उनके मुख्यमंत्री के रूप में वापसी का रास्ता साफ हो गया है। वे 28 नवंबर को भव्य समारोह में झारखंड के 14वें मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वह अब तक तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं। यानी इस बार वे चौथी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बनेंगे।
झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन से कड़ी चुनौती के बावजूद इंडिया गठबंधन को प्रचंड जीत मिली है। जेएमएम के नेतृत्व में झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी। राज्य के मुख्यमंत्री एक बार फिर से हेमंत सोरेन होंगे। उन्होंने राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है।
झारखंड में इंडिया गठबंधन ने 56 सीटों पर जीत हासिल की है। इनमें JMM को 34, कांग्रेस का 16, RJD को 4, CPIML को 2 सीटों पर जीत मिली है। वहीं एनडीए गठबंधन को 24 सीटों पर जीत हासिल हुई है। इनमें बीजेपी को 21, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास, JDU और AJSU को एक- एक सीट पर जीत मिली है। एक सीट झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के खाते में गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बरहेट से 39,791 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की और इस निर्वाचन क्षेत्र में उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के गमलील हेमब्रोम थे।
अपने पिता शिबू सोरेन से विरासत में मिली थी राजनीति
हेमंत सोरेन को राजनीति अपने पिता शिबू सोरेन से विरासत में मिली है, जो झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक अध्यक्ष थे। रामगढ़ जिले के छोटे से ग्राम नेमारा 10 अगस्त 1975 को जन्मे हेमंत सोरेन ने 23 दिसंबर 2009 को विधान सभा सदस्य के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया। बाद में वह 11 सितंबर 2010 से 8 जनवरी 2013 तक झारखंड के उपमुख्यमंत्री बने। हालांकि, इससे पहले वह 24 जून 2009 से 4 जनवरी 2010 तक राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
2013 में पहली बार बने मुख्यमंत्री
हेमंत सोरेन 2013 में पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे। राज्य से राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के बाद कांग्रेस और आरजेडी के समर्थन से उन्होंने 15 जुलाई 2013 को झारखंड के पांचवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, लेकिन 2014 हुए विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ा। पांच साल उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। इस दौरान आदिवासी भूमि कानून संशोधन के खिलाफ हुए पत्थलगड़ी आंदोलन में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया।
हेमंत ने 2016 में भाजपा सरकार के इन संशोधनों का किया था कड़ा विरोध
2016 में झारखंड की भाजपा सरकार ने छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम में संशोधन करने की कोशिश की थी, जिसके तहत आदिवासी भूमि के मालिकों और किरायेदारों को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी और दूसरे संशोधन के तहत आदिवासी भूमि को सड़क, नहर, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और अन्य सरकारी उद्देश्यों के निर्माण के लिए हस्तांतरित करने की अनुमति दी जाएगी। इसके कारण राज्य में भारी विरोध हुआ और हेमंत ने इन संशोधनों का कड़ा विरोध किया था।
इसके बाद 2017 में सीएम रघुबर दास ने हेमंत को ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में आमंत्रित किया था, लेकिन हेमंत ने इस समिट को “भूमि हड़पने वालों का महा चिंतन शिविर” कहा और दावा किया कि यह राज्य के आदिवासियों, मूलवासियों और किसानों की जमीन लूटने के लिए आयोजित किया जा रहा है। काश्तकारी अधिनियम, 1908 और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम, 1949 ने आदिवासी समुदायों के भूमि पर अधिकारों की रक्षा की थी।
आदिवासी लोगों ने प्रस्तावित कानून पर कड़ी आपत्ति जताई थी। पत्थलगड़ी विद्रोह के दौरान, काश्तकारी अधिनियमों में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। एक घटना में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और आदिवासियों ने भाजपा सांसद करिया मुंडा के सुरक्षा दल का अपहरण कर लिया। पुलिस ने आदिवासियों पर हिंसक कार्रवाई की, जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति की मौत हो गई। आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी सहित 200 से अधिक लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। तब विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने कहा था कि भाजपा सरकार कॉरपोरेट्स के लाभ के लिए दो संशोधन विधेयकों के माध्यम से आदिवासियों की भूमि का अधिग्रहण करना चाहती है। विपक्षी दलों झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा और अन्य ने बिल के खिलाफ़ भारी दबाव बनाया था। तब तत्कालीन राज्यपाल मुर्मू ने बिलों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया और उन्हें मिले ज्ञापनों के साथ बिल को राज्य सरकार को वापस कर दिया।
अक्टूबर 2017 में, सोरेन ने 11 वर्षीय लड़की संतोषी कुमारी की मौत की सीबीआई जांच की मांग की थी, जो सिमडेगा में कथित तौर पर भूख से मर गई थी क्योंकि परिवार को जुलाई से राशन नहीं दिया गया था क्योंकि उनके बैंक खाते में आधार नंबर नहीं था। सोरेन ने मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने कहा कि उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक आदेश पारित किया था जिसमें उन परिवारों के नाम हटाने के लिए कहा गया था जिन्होंने अपने राशन कार्ड को अपने आधार नंबर से नहीं जोड़ा था। वह पीडीएस में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के मुखर विरोधी रहे हैं।
2019 में दूसरी बार बने मुख्यमंत्री
2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी गठबंधन की जीत के बाद हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर 2019 को झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी बार शपथ ली थी। चुनाव आयोग ने झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस को एक याचिका पर अपनी राय भेजी है जिसमें मांग की गई है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खुद को खनन पट्टा देकर चुनावी कानून का उल्लंघन करने के लिए विधायक के रूप में अयोग्य ठहराया जाए।। 31 जनवरी 2024 को भूमि घोटाले के आरोपों के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। उन्होंने झारखंड के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। उन्हें ज़मानत मिल गई और 28 जून 2024 को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया। चंपई सोरेन ने 3 जुलाई 2024 को झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया और हेमंत सोरन ने झारखंड के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन के सामने सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने 4 जुलाई 2024 को झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ ली। अब 2024 के विधानसभा में प्रचंड बहुमत से जीत के बाद वे चौथी बार अपनी ताजपोशी की तैयारी में हैं।




