नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में एक अभूतपूर्व और साहसिक कदम उठाया है। जहां उन्होंने घोषणा की है कि,अब वह नियमित रूप से राज्य के जिला अस्पतालों की ओपीडी में जाकर खुद मरीजों का इलाज करेंगे।
एक डॉक्टर की तरह सेवा का प्रण
डॉ. अंसारी ने स्पष्ट किया कि उनकी यह पहल मंत्री पद की जिम्मेदारी के तहत नहीं, बल्कि पेशेवर डॉक्टर के रूप में की जाएगी। उन्होंने कहा, मैं सबसे पहले एक डॉक्टर हूं। मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि डॉक्टर के रूप में ओपीडी में बैठने से मुझे अस्पतालों की जमीनी हकीकत का पता चलेगा। उनका यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में समीक्षा और सुधार की दिशा में लिया गया है। इससे मरीजों, डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ के साथ सीधा संवाद स्थापित होगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक समस्याओं की पहचान होगी वहीं राज्य के अस्पतालों में बेहतर प्रबंधन और समय पर इलाज सुनिश्चित होगा।
RIMS के औचक निरीक्षण के बाद फैसला
डॉ. अंसारी ने यह ऐलान रांची स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RIMS) के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने, इमरजेंसी वार्ड और डायग्नोस्टिक सुविधाओं का जायजा लिया। अस्पताल की सफाई, दवाओं की उपलब्धता और संसाधनों का मूल्यांकन किया। जहां मरीजों और स्टाफ से सीधी बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना।
उन्होंने कहा, सरकारी अस्पतालों का दायित्व सिर्फ अच्छा इलाज देना ही नहीं, बल्कि मरीजों को मानवीय व्यवहार, समय पर दवा और सम्मान देना भी है। हर मरीज को उचित देखभाल का पूरा हक है।
अस्पताल प्रशासन को सख्त निर्देश
डॉ. अंसारी ने राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक सुधार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में साफ-सफाई और हाइजीन का स्तर बढ़ाना व दवाओं की पूरी उपलब्धता सुनिश्चित करना।
शिकायत निवारण प्रणाली को प्रभावी बनाना
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉ. अंसारी की यह पहल राज्य में जनता-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं और खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। डॉ. अंसारी का यह कदम न केवल राजनीतिक साहस दिखाता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञ इसे अन्य राज्यों के लिए उदाहरण भी बता रहे हैं।





