नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDU मेडिकल कॉलेज) की मान्यता रद्द कर दी गई है। यह फैसला राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने लिया है। NMC ने कॉलेज में MBBS कोर्स चलाने की अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। गौरतलब है कि 2025-26 सत्र में कॉलेज में 50 MBBS सीटें मंजूर थीं, लेकिन अब इन सीटों पर नया एडमिशन नहीं होगा। हालांकि NMC ने स्पष्ट किया है कि इस सेशन में एडमिशन लेने वाले छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी, और उन्हें जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
काकरयाल स्थित यह मेडिकल कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड से जुड़ा हुआ है। सितंबर 2025 में NMC ने इसे 50 सीटों के साथ MBBS कोर्स शुरू करने की इजाजत दी थी। हालाँकि, 2 जनवरी 2026 को NMC के चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (MARB) ने कॉलेज का सजग निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर कमियां सामने आईं। निरीक्षण में यह पाया गया कि कॉलेज न्यूनतम मानकों को पूरा करने में विफल रहा है।
कॉलेज में पाई गई कमियां
सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों और डॉक्टरों की कमी थी। कॉलेज में जरूरत के मुकाबले 39% कम शिक्षक थे। ट्यूटर, प्रदर्शक और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी तो 65% तक थी। अच्छे मेडिकल कॉलेज में भरपूर स्टाफ होना आवश्यक होता है ताकि छात्रों को सही ट्रेनिंग मिल सके, लेकिन यहां बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं थीं।
मरीजों की संख्या भी बेहद कम पाई गई। नियमों के मुताबिक कॉलेज की ओपीडी में रोजाना कम से कम 400 मरीज आने चाहिए थे, लेकिन वास्तविक संख्या सिर्फ 182 थी। अस्पताल के बेड भी अधूरे इस्तेमाल हो रहे थे। कुल 80% भरे होने चाहिए थे, लेकिन केवल 45% ही भरे थे। ICU में भी आधे ही बेड का उपयोग हो रहा था और डिलीवरी मामलों की संख्या केवल 25 ही थी। छात्रों के लिए प्रैक्टिकल अनुभव और ट्रेनिंग के लिए यह गंभीर कमी मानी गई।
लाइब्रेरी में जरूरत के मुकाबले सिर्फ 744 किताबें थीं
कॉलेज की लाइब्रेरी और अन्य सुविधाओं की स्थिति भी निराशाजनक रही। लाइब्रेरी में जरूरत के मुकाबले सिर्फ 744 किताबें थीं, जबकि आवश्यक संख्या 1500 थी। मेडिकल जर्नल्स सिर्फ 2 उपलब्ध थे, जबकि 15 होना आवश्यक था। कई विभागों में लैब, रिसर्च रूम और व्याख्यान कक्ष जैसी बेसिक सुविधाएं नहीं थीं। पुरुष और महिला मरीजों के लिए अलग वार्ड उपलब्ध नहीं थे, और छोटे ऑपरेशन के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं थी। कॉलेज में सिर्फ 2 ऑपरेशन थिएटर काम कर रहे थे।
छात्रों का भविष्य सुरक्षित
सबसे अहम सवाल यह है कि अब इस सेशन में एडमिशन लेने वाले छात्रों का क्या होगा। NMC ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र की सीट नहीं जाएगी। छात्रों को अतिरिक्त सीटों के रूप में जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में भेजा जाएगा। यह जिम्मेदारी केंद्र शासित प्रदेश की सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर है, जो छात्रों को नए कॉलेजों में एडजस्ट करने का काम जल्द पूरा करेंगे। इसका मतलब है कि छात्रों की पढ़ाई बिना किसी व्यवधान के जारी रहेगी।
मान्यता प्राप्त संस्थानों में अपने कोर्स को जारी रख सकते हैं
SMVDU मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने का फैसला छात्रों के लिए डरावना हो सकता है, लेकिन NMC की योजना और सरकार की सक्रियता के कारण छात्रों की शिक्षा प्रभावित नहीं होगी। कॉलेज में शिक्षक, डॉक्टर, मरीज और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर कमियों के कारण यह कदम उठाया गया। छात्रों के लिए राहत की बात यह है कि उनका करियर और MBBS कोर्स सुरक्षित रहेगा, और वे अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों में अपने कोर्स को जारी रख सकते हैं।
यह मामला एक बार फिर मेडिकल कॉलेजों में गुणवत्ता और नियमों के पालन की अहमियत को रेखांकित करता है। NMC का सख्त निरीक्षण और मानकों की समीक्षा यह सुनिश्चित करती है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और स्वास्थ्य सेवा की भी उचित ट्रेनिंग हो सके।





