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शांता कुमार ने फिर की जैनरिक दवाईयों की वकालत

पालमपुर, 08 मई (हि. स.)। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा है कि कोरोना का सबसे बढ़िया ईलाज है सभी लोगों को बैकसीन टीका लगाना। सबसे अधिक ईजराइल ने लगाया। बिमारी काफी कम हो गई। यह कहा जा रहा है कि पेटेंट कानून के कारण स्वदेशी कम्पनियां टीका नहीं बना पा रही है। उन्होंने कहा कि 2011-12 में वे संसद की स्थाई समिति के अध्यक्ष थे। कमेटी ने ब्रांडेड और जैनरिक दवाई उद्योग पर गहरा अध्ययन किया और सरकार को रिपोर्ट दी थी। कमेटी ने यह कहा था कि विदेषी बहुराश्ट्रीय दवाई कम्पनियां पेटेंट के नाम पर देष को लूट रही हैं रिपोर्ट में कहा था कि वायर कम्पनी की कैंसर की एक दवाई मैक्सावार 2लाख 80 हजार रू0 में बिक रही थी। उस समय की सरकार ने नियमों का अध्ययन किया उसके अनुसार किसी आपात स्थिति में सरकार स्वदेशी कम्पनी को कम्पलसरी लाईसेंस दे सकती है। उसी दवाई को बनाने का लाईसेंस हैदराबाद की नैटको कम्पनी को दिया गया। जो दवाई 2 लाख 80 हजार रू0 में बिक रही थी वहीं दवाई उसी गुणवत्ता की 8 हजार 8 सौ रू0 में बिकने लगी। उन्होंने आगे कहा कि कमेटी ने रिपोर्ट मे कहा कि विदेशी कम्पनियां ब्रांडेड दवाई में इसी प्रकार से गरीबों को लूट रही है। शांता कुमार ने कहा कि उस समय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नडडा थे। मैंने उनसे बात की - कमेटी के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री से मिले और प्रधानमंत्री जी ने सूरत में सार्वजनिक रूप से कहा कि भारत एक कानून बना रहा है। जिसके द्वारा डाक्टरों को रोगी की पर्ची पर केवल जैनरिक दवाई ही लिखनी होगी। कहा कि बहुराश्ट्रीय विदेशी कम्पनियों के दबाव के कारण प्रधानमंत्री की घोषणा आज तक लागू नहीं हुई। यह सोच कर वे बहुत व्यथित होते हैं। उन्होंने कहा कि आज की परिस्थिति उससे भी भयंकर है। सरकार अतिशीघ्र टीका बनाने का भारतीय कम्पनियों को कम्पसलरी लाईसेंस दें। करोड़ों में उत्पादन हो। भारत के सभी हस्पतालों में टीका पहुंचे। सरकार ने आज तक इस बात का उत्तर नही दिया कि इतने बड़े भयंकर संकट में भी कम्पसलरी लाईसेंस क्यों नहीं दिया जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनील/उज्जवल

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