नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के बीच बड़ी हलचल पैदा कर दी है। अब स्कूलों में टीचरों को गाइडबुक या हेल्पबुक का इस्तेमाल करके पढ़ाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। आदेशों का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और छात्रों में सीखने की क्षमता को बढ़ाना है।
क्लासरूम में हेल्पबुक पर पूरी रोक
आदेशों के अनुसार, किसी भी शिक्षक द्वारा क्लास में हेल्पबुक या गाइडबुक का इस्तेमाल पाया गया, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। स्कूल के मुख्य अध्यापक और प्रिंसिपल इस आदेश को लागू करने के लिए अधिकृत किए गए हैं। निदेशालय ने स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे क्लास का अचानक निरीक्षण करें और अगर कोई शिक्षक नियम तोड़ता पाया जाता है, तो इसकी रिपोर्ट तुरंत निदेशालय को भेजी जाए। सभी जिलों के उप निदेशकों को भी इस आदेश की जानकारी दे दी गई है और उनका कर्तव्य है कि वे स्कूलों में नियमित निगरानी रखें।
केवल NCERT की किताबों का इस्तेमाल होगा स्वीकार
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि क्लास में पढ़ाने के लिए केवल NCERT की किताबें ही स्वीकार्य होंगी। कुछ स्कूलों से शिकायतें मिली थीं कि शिक्षक गाइडबुक या हेल्पबुक का इस्तेमाल कर छात्रों को पढ़ा रहे हैं। ऐसा करने से छात्रों की सोचने और समझने की क्षमता प्रभावित होती है। निदेशक आशीष कोहली ने बताया कि हेल्पबुक नई समझ विकसित नहीं करती और यह शिक्षा के उद्देश्य के विपरीत है।
शिक्षा का लक्ष्य: सोच और समझ विकसित करना
आशीष कोहली ने कहा कि कई स्कूलों में पहले भी ऐसी शिकायतें मिली थीं और पहले निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन कई जगहों पर उनका पालन नहीं हुआ। अब विभाग ने सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों की सोच, समझ और सवाल पूछने की क्षमता को विकसित करना है, और हेल्पबुक इस क्षमता को रोकती है। इस कदम से शिक्षकों में सचेतना बढ़ेगी और छात्रों को मजबूत शैक्षिक आधार प्राप्त होगा।
इस आदेश के लागू होने के साथ ही हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए शिक्षा प्रणाली में कड़ी अनुशासनात्मक और शैक्षिक सुधार की प्रक्रिया शुरू हो गई है।





