परिजन छोड़ चुके थे उम्मीद शिमला, 02 जून (हि.स.)। अपने पिता से मिलने की उम्मीद छोड़ चुका पुत्र आठ साल बाद उन्हें सामने देखकर भावुक हो गया। बेटे की आंखें भर आईं और उसे गले से लगा लिया। पिता आठ साल से लापता था, जिसे पुलिस ने ढूंढकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। मामला हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ठियोग थाना क्षेत्र का है। कोरोना महामारी में पुलिस की इस नेकी की हर कोई सराहना कर रहा है। बिहार का रहने वाला 55 वर्षीय एक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार था। पिछले दिनों कर्फ्यू के बीच वह ठियोग बाजार में घूम रहा था। पुलिस के जवानों की उस पर नजर पड़ी और उसे थाने ले जाया गया। प्रथम दृष्टया यह व्यक्ति मानसिक रुप से बीमार लग रहा था। पुलिस ने इस व्यक्ति को खाना खिलाया, कपड़े पहनाए और रात को सोने के लिए बिस्तर भी दिया। पड़ताल के दौरान पाया कि ये व्यक्ति मूलतः बिहार के शेखापुर का रहने वाला है और भटककर ठियोग पहुंच गया है। ठियोग पुलिस ने बिहार पुलिस से संवाद किया और वाट्सअप के माध्यम से उक्त व्यक्ति का फोटो व पता भेजा। बिहार पुलिस ने परिजनों का पता खंगाल कर ठियोग पुलिस को सूचित किया कि इस व्यक्ति का वास्तविक नाम चतुरानन्द है तथा वह थोडा मानसिक रुप से परेशान होने के कारण करीब आठ सालों से घर से लापता हैं। उसके परिवार में पत्नी व उसका एक बेटा है। ठियोग पुलिस की पहल पर सूरज कुमार एक परिजन के साथ अपने पिता को लेने मंगलवार को ठियोग पहुंचा। जहां पुलिस ने औपचारिकता पूरी करने के बाद चतुरानन्द को उसके बेटे के हवाले कर दिया। परिजनों के आने तक पुलिस ने 10 दिन तक चतुरानन्द को वृद्ध आश्रम चौपाल में अपनी निगरानी में रखा था। बेटे सूरज ने बताया कि उसके पिता आठ साल से लापता थे तथा उन्हें लगता था कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन अब पिता के मिल जाने पर वह खुश हैं और ठियोग पुलिस के इस एहसान को हमेशा याद रखेंगे। ठियोग के डीएसपी कुलविंद्र सिंह ने बुधवार को बताया कि चतुरानन्द नामक व्यक्ति को उसके सुपुत्र सूरज को सौंप दिया गया है। वह अपने एक रिश्तेदार के साथ बिहार के शेखापुर से ठियोग पहुंचा था। उन्होंने मानवता के इस कार्य के लिए ठियोग पुलिस के एसएचओ व कर्मियों की पीठ थपथपाई। हिन्दुस्थान समाचार/उज्ज्वल/सुनील




