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Monday, March 2, 2026
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हरियाणा सरकार ने बैन किया ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल, सभी विभागों को मिला सख्त आदेश

हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को आदेश दिया है कि वे आधिकारिक संचार में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हरियाणा सरकार ने समाजिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। जहां महात्मा गांधी ने पहले अनुसूचित जातियों के लिए ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसका अर्थ है ‘ईश्वर के लोग’, लेकिन बी.आर. आंबेडकर इसके खिलाफ थे और वे इन्हें ‘दलित’ कहना पसंद करते थे। अब हरियाणा सरकार ने सभी प्रशासनिक विभागों, बोर्डों, निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों, विश्वविद्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे सभी आधिकारिक पत्राचार, अभिलेख और संचार में इन शब्दों का प्रयोग पूरी तरह बंद करें।

”सही शब्दावली का प्रयोग सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा”

राज्य सरकार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि भारत का संविधान अनुसूचित जातियों और जनजातियों को दर्शाने के लिए ‘हरिजन’ या ‘गिरिजन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुसार, अब राज्य के सभी विभागों और अधिकारियों को संवैधानिक और सामाजिक दृष्टि से सही शब्दावली का प्रयोग सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।

केंद्र सरकार के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है

सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारत का संविधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को दर्शाने के लिए ‘हरिजन’ या ‘गिरिजन’ शब्दों का इस्तेमाल नहीं करता। राज्य सरकार ने भारत सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। आदेश में यह भी कहा गया कि कुछ विभाग अभी तक इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे, इसलिए सभी विभागों और अधिकारियों को केंद्र सरकार के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

”सभी वर्गों के लिए सम्मानजनक भाषा अपनाई जाए”

इस निर्णय से न केवल संवैधानिक सटीकता सुनिश्चित होगी, बल्कि समाज में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना भी मजबूत होगी। अब से सरकारी और आधिकारिक संचार में केवल संवैधानिक रूप से मान्य शब्दों का ही प्रयोग किया जाएगा।

हरियाणा सरकार का यह कदम समाज में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके माध्यम से राज्य प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संवेदनशील शब्दावली का उपयोग न हो और सभी वर्गों के लिए सम्मानजनक भाषा अपनाई जाए।

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