नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस ने नायब सैनी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। विधानसभा स्पीकर हरविंदर कल्याण ने कांग्रेस का नोटिस स्वीकार करते हुए इसे सदन की कार्यसूची में शामिल कर लिया है। अब यह प्रस्ताव कल, शुक्रवार को विधानसभा में चर्चा के लिए लाया जाएगा। कांग्रेस ने इस कदम के जरिए सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। विपक्ष का कहना है कि वर्तमान सरकार ने जनता के भरोसे को कमजोर किया है और इसलिए सदन में विश्वास का इम्तहान देने की जरूरत है।
स्पीकर द्वारा नोटिस स्वीकार किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि विधानसभा में इस प्रस्ताव पर बहस और उसके बाद होने वाले मतदान से सरकार के प्रति सदस्यों का समर्थन कितना मजबूत है, यह स्पष्ट हो जाएगा।
सैनी सरकार का रुख
सैनी सरकार और उसके समर्थक विपक्ष के इस कदम को केवल राजनीतिक दांव-बाजी मान रहे हैं। सरकार ने कहा है कि वह विधानसभा में मजबूती से इसका मुकाबला करेगी और भरोसा दिलाया है कि बहुमत के कारण सरकार स्थिर है।
विधानसभा में राजनीतिक समीकरण
हरियाणा में कुल 90 सदस्यीय विधानसभा है। 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टीवार सीटों का वितरण इस प्रकार हुआ था:-
बीजेपी: 48 सीटें
कांग्रेस: 37 सीटें
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो): 2 सीटें
निर्दलीय: 3 सीटें
विशेषज्ञों का कहना है कि बहुमत की स्थिति (46 सीटें) के कारण सरकार सीधे खतरे में नहीं है, लेकिन विपक्ष की सक्रियता और सदस्यों की संभावित राय बदलने की संभावना से विधानसभा में राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है।
राजनीतिक महत्व
अविश्वास प्रस्ताव सदन में सरकार के प्रति सदस्यों के विश्वास की परीक्षा है। यदि प्रस्ताव पास हो जाता है तो इसका मतलब होगा कि सरकार को विधानसभा का समर्थन नहीं मिला। वहीं, यदि यह असफल रहता है, तो सरकार अपनी स्थिति को मजबूत करके विपक्ष पर दबाव बना सकती है।
2024 में लगातार तीसरी बार सत्ता में आई बीजेपी के लिए यह प्रस्ताव एक चुनौती भरा राजनीतिक मोड़ है। विपक्ष इसे सरकार की नीतियों पर दबाव बनाने और जनता के सामने अपनी साख मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहा है।





