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Monday, March 2, 2026
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गोवा में फैक्ट्री कर्मचारियों की ड्यूटी अब 10 घंटे, विधानसभा में बिल पारित, ओवरटाइम की भी बढ़ी समय-सीमा

गोवा सरकार ने एक अहम बिल पारित है। राज्‍य के फैक्ट्री कर्मचारियों की कार्य अवधि में बदलाव करते हुए अब इसे 9 से बढ़ाकर 10 घंटे करने का प्रस्ताव पारित किया गया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । गोवा सरकार ने फैक्ट्री कर्मचारियों की कार्य अवधि में बदलाव करते हुए एक अहम फैसला लिया है। अब राज्य में फैक्ट्रियों में काम करने वाले कर्मचारियों को प्रतिदिन 9 की जगह 10 घंटे काम करना होगा। यह निर्णय गोवा विधानसभा में गुरुवार देर रात पारित किए गए एक संशोधित विधेयक के माध्यम से लिया गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य राज्य में व्यापारिक माहौल को और बेहतर बनाना है। सरकार ने इस कदम को ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी कारोबार को सुगम बनाने की दिशा में एक अहम पहल बताया है। साथ ही, औद्योगिक नियमों को सरल और निवेश के अनुकूल बनाने की मंशा भी इसके पीछे बताई जा रही है। इसके अलावा, नए बिल में ओवरटाइम से जुड़े प्रावधानों में भी कुछ संशोधन किए गए हैं।

ओवरटाइम की सीमा बढ़ी

गोवा विधानसभा में गुरुवार को ‘फैक्ट्रीज (गोवा संशोधन) विधेयक’ पारित किया गया, जिसे राज्य के फैक्ट्री और बॉयलर्स मंत्री नीलकंठ हालारणकर ने सदन में पेश किया। इस विधेयक के जरिए फैक्ट्री कर्मचारियों के कार्य घंटों और ओवरटाइम की सीमा में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। बिल के मुताबिक, अब वयस्क कर्मचारियों का दैनिक कार्य समय एक घंटे बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया है। यह संशोधन केंद्र सरकार के फैक्ट्री अधिनियम की धारा 54 में परिवर्तन के तहत किया गया है। 

इसके साथ ही, ओवरटाइम को लेकर भी अहम बदलाव हुआ है। अधिनियम की धारा 65 में संशोधन करते हुए तिमाही आधार पर ओवरटाइम की अधिकतम सीमा को 125 घंटे से बढ़ाकर 144 घंटे कर दिया गया है। यह बदलाव उद्योगों में अधिक लचीलापन लाने और उत्पादन आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। 

राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा बिल 

‘फैक्ट्रीज (गोवा संशोधन) विधेयक’ को लेकर सरकार का कहना है कि इन बदलावों से फैक्ट्रियों को संचालन में अधिक लचीलापन मिलेगा, जिससे वे उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप कार्य कर सकेंगी। साथ ही, श्रमिकों की सुरक्षा और कानूनी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि इस संशोधन से राज्य सरकार के खजाने पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि बिल को अब अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह संशोधन कानून के रूप में प्रभावी होगा।

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