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Sunday, April 5, 2026
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आंबेडकर मामले में अनुसूचित जाति आयोग की सख्ती के बाद SC के 18 युवकों पर दर्ज FIR निरस्त

आयोग ने आंध्र प्रदेश सरकार के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था प्रमुख सचिव अपने स्तर पर निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से जांच करें।

नई दिल्ली, एजेंसी। आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले के एक होटल में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर छपी कागज की प्लेट्स पर भोजन परोसने के मामले में मंगलवार को आयोग में सुनवाई हुई। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला ने बताया कि सुनवाई के दौरान पुलिस ने आयोग को जानकारी दी कि मामले में एससी-एसटी एक्ट व भारतीय दण्ड संहिता की धारा 295-ए को आयोग के निर्देशानुसार जोड़ दिया गया है। साथ ही अनुसूचित जाति के 18 युवकों पर की गई एफआईआर को भी निरस्त कर दिया गया। इस दौरान आंध्र प्रदेश सरकार की जी जयलक्ष्मी, प्रमुख सचिव (समाज कल्याण विभाग), कलेक्टर हिमांशु शुक्ला, गुंटूर रेंज के आईजी आईपीएस जे. प्रभाकर राव, कोनासीमा जिले के एसपी सुधीर कुमार रेड्डी मौजूद रहे।

18 अनुसूचित जाति युवकों के खिलाफ दर्ज झूठी एफआईआर निरस्त

विजय सांपला ने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान आयोग ने आंध्र प्रदेश सरकार के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था प्रमुख सचिव अपने स्तर पर निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से जांच करें। एसपी कोनासीमा को मामले में 18 अनुसूचित जाति युवकों के खिलाफ दर्ज झूठी एफआईआर को तुरन्त निरस्त करने एवं एफआईआर में आईपीसी की संबंधित धाराओं को शामिल कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

होटल मालिक ने अनुसूचित जाति के युवकों के खिलाफ कराई थी एफआईआर

बता दें कि आयोग को 8 जुलाई 2022 को सोशल मीडिया ट्विटर के माध्यम से एक शिकायत मिली जिसमें यह आरोप लगाया गया कि आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले के एक होटल में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर छपी कागज की प्लेट्स पर भोजन परोसा गया। जब अनुसूचित जाति के व्यक्तियों द्वारा इस घटना के खिलाफ आवाज उठाई गई तो आरोपी होटल मालिक ने शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति के 18 युवकों के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करा दी। पुलिस ने सभी 18 युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा निर्दोष अनुसूचित जाति के युवकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रदद करने एवं दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की।

होटल मालिक एवं कागज प्लेट विक्रेता को गिरफ्तार किया गया

पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 एवं आईपीसी की धाराओं के तहत जांच की और आरोप सही पाये जाने पर आरोपी होटल मालिक एवं कागज प्लेट विक्रेता को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में विस्तृत सुनवाई के बाद आयोग ने पाया कि आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा मामले की निष्पक्षता से जांच नहीं की गई और निर्दोष 18 अनुसूचित जाति युवकों के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया एवं उनके विरुद्ध दर्ज की गई एफआईआर को अभी तक रद्द नहीं किया गया।

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