How Prime Ministers Decide किताब में क्या है खास? CM केजरीवाल ने तिहाड़ में पढ़ने की जताई इच्छा

Arvind Kejriwal Judicial Custody: कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है।
Arvind Kejriwal, How Prime Ministers Decide
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। दिल्ली शराब नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रहीं है। इस मामले में गिरफ्तार चल चल रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आज ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है।

केजरीवाल ने जेल में पढ़ने के लिए मांगी 3 किताब

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने जेल जाने से पहले अपने वकीलों के माध्यम से कोर्ट में याचिका दायर कर रामायण, महाभारत, गीता जैसी धार्मिक किताबों के साथ पत्रकार नीरजा चौधरी की लिखित हाऊ प्राइम मिनिस्टर डिसाइड किताब पढ़ने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगी। रामायण, महाभारत और गीता जैसी धार्मिक किताबों के विषय में ते हम आप पहले से ही जानते हैं। हम यहां अपको हाऊ प्राइम मिनिस्टर डिसाइड किताब के विषय में बताने जा रहें है। आखिर इस किताब में ऐसा क्या है? जिसकी मांग सीएम केजरीवाल ने की है। इस किताब को पत्रकार नीरजा चौधरी ने लिखा है जिसमें प्रधानमंत्री कैसे निर्णय लेते हैं के बारे में लिखा गया है।

इस किताब में क्या है खास?

केजरीवाल ने जेल में हाऊ प्राइम मिनिस्टर डिसाइड किताब रखने की मांग की है। इस किताब को पत्रकार नीरजा चौधरी ने लिखा है जिसमें प्रधानमंत्री कैसे निर्णय लेते हैं के बारे में बताया गया है। इस किताब की लेखक पत्रकार नीरजा चौधरी ने इसमें भारत के छह प्रधानमंत्रियों के बड़े फैसले लेने के दौरन उनकी स्थिति और मनःस्थिति पर पड़ रहें प्रभाव के विषय में बात की है। इस किताब में लेखिका नीरजा चौधरी ने भारत के प्रधानमंत्रियों के फैसलों पर पर बहुत ही बारीकी से बात कि है। इसमें उन्होंने बताया है कि प्रधानमंत्रियों ने कैसे अपने फैसलों से देश के इतिहास की दिशा बदल दी थी।

लेखिका ने 1980 और 2014 के बीच छह प्रधानमंत्रियों के प्रमुख निर्णयों को किया शामिल

किताब में नीरजा चौधरी ने समाचार सुर्खियों से परे जाकर बात की है। यह बताती है कि आखिर स्वतंत्र भारत में कैसे कुछ सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय लिए गए थे। लेखिका ने 1980 और 2014 के बीच छह प्रधानमंत्रियों द्वारा लिए गए छह प्रमुख निर्णयों के बारे में बताया है। वहीं इस किताब में लेखिका ने ऐतिहासिक महत्व के छह निर्णयों के चश्मे से देश के प्रधानमंत्रियों की कार्यशैली का विश्लेषण किया है।

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