क्या इंदिरा गांधी ने भारत का द्वीप श्रीलंका को दे दिया? पीएम मोदी ने कच्चातीवु द्वीप पर क्या दावा किया

Katchatheevu Island: भाजपा इस मुद्दे से दक्षिण राज्यों में कुछ हद तक अपना मकसद बताने में सफल होगी। यह पीएम मोदी का कांग्रेस पर बड़ा हमला है।
Katchatheevu Island
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। लोकसभा चुनाव से पहले कच्चातिवु द्वीप का मुद्दा काफी गरमा गया है। यह द्वीप रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच स्थित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस द्वीप(कच्चातिवु द्वीप) के मुद्दे को उठाते हुए कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लिया है। मोदी ने एक आरटीआई के जवाब का हवाला देते हुए अपने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा ''ये चौंकाने वाला है। नए तथ्यों से पता चला है कि कांग्रेस ने जानबूझकर कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को दे दिया था। इसे लेकर हर भारतीय गुस्सा है और एक बार फिर से मानने पर मजबूर कर दिया है कि हम कांग्रेस पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। भारत की अखंडता, एकता को कम कर और हितों को कमजोर करना ही कांग्रेस के काम करने का तरीका है। जो 75 सालों से जारी है।''

इसको लेकर दक्षिण राज्यों में हमेशा असंतोष रहा है

भाजपा इस मुद्दे से दक्षिण राज्यों में कुछ हद तक अपना मकसद बताने में सफल होगी। यह पीएम मोदी का कांग्रेस पर बड़ा हमला है। जिसे मोदी ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सबके सामने रखकर कर, कांग्रेस के पूर्व में लिए गए फैसलों के कारण भारत को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया है। यह मुद्दा तमिलनाडु में हमेशा से काफी सुर्खियों में रहा है। इसको लेकर दक्षिण राज्यों में हमेशा असंतोष रहा है। अब पीएम मोदी के द्वारा इस मुद्दे को उठाने से अब पूरे देश में यह मुद्दा गरमा गया है। हर कोई इसके बारे में जानना चाहता है।

दक्षिण में इस समझौते को लेकर बड़ा असंतोष है

कच्चातिवु द्वीप 285 एकड़ में फैला हुआ है। यह द्वीप रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच में है। यह द्वीप 17वीं सदी में मदुरई के राजा रामानंद के अधीन था। जब अंग्रेजो का शासन आया तो यह द्वीप मद्रास सूबे में आ गया। वर्ष 1921 में भारत और श्रीलंका ने इस द्वीप पर अपना अपना दावा ठोका, यह दावा दोनों देशों ने मछली पकड़ने को लेकर ठोका। लेकिन उस समय इस मुद्दे का कोई ठोस हल नहीं निकल पाया था। लेकिन आजादी के बाद यह मुद्दा फिर से उठने लगा था। वर्ष 1974 में भारत की तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी और श्रीलंका के राष्ट्रपति श्रीमावो भंडारनायके के बीच इस द्वीप को लेकर समझौता हो गया।

इसको लेकर दोनों देशो के बीच 2 दौर की बातचीत 26 जून, 1974 और 28 जून 1974 को हुई। उस बातचीत के बाद दोनों देशो के बीच कुछ शर्तो पर सहमति हुई। इस बातचीत को कोलंबो और दिल्ली दोनों जगहों पर अंजाम दिया गया था। इस समझौते में जो शर्त रखी गई थी उसके अनुसार भारतीय मछुआरे जाल सुखाने के लिए ही इस द्वीप का इस्तेमाल कर पाएंगे और द्वीप में बने चर्च में जाने के लिए भारतीय लोगो को वीजा की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं इस समझौते के अनुसार भारतीय मछुआरों को इस द्वीप से मछली पकड़ने की अनुमति नहीं होगी। दक्षिण में इस समझौते को लेकर बड़ा असंतोष है।

ऐसे में पीएम मोदी का बयान कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है

इस समझौते से दक्षिण में असंतोष तो था ही। अब भारतीय हिस्से के जल में लगभग मछलियां खत्म हो गई है। जिसके कारण मछली खोजते हुए तमिलनाडु के रामेश्वरम जिलों के मछुआरे कच्चातिवु द्वीप की तरफ चले जाते हैं। जिसके कारण पूर्व में हुए समझौते का उल्लंघन होता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पार करने पर श्रीलंका की नौसेना उन्हें हिरासत में ले लेती है। ऐसे में पीएम मोदी का बयान कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

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