Note For Vote Case: वोट के बदले नोट पर SC की चोट, 28 साल पुराना फैसला पलटा, PM मोदी ने की तारीफ

New Delhi: वोट के बदले नोट मामले में MM विधायक सीता सोरेन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने इस मामले में उन्हें राहत देने से मना कर दिया है। साथ ही 1998 के फैसले को भी पलट दिया।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने आज वोट के बदले नोट मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 28 साल पुराने पीवी नरसिम्हा राव बनाम CBI केस के फैसले को पलट दिया। इस मामले में JMM विधायक सीता सोरेन पर वोट के बदले नोट मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

वोट के बदले नोट पर अब नेताओं पर चलेगा मुकदमा

वोट के बदले नोट मामले में आज सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच जिसमें चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ के अलावा जस्टिस एएस बोपन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस जेबी पारदीवाला, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इस केस की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा- साल 1998 के फैसले को देखते हुए छूट नहीं दी जा सकती है। वोट के बदले नोट भ्रष्टाचार के तहत मुकदमा से कोई भी सांसद या विधायक नहीं बच सकता है।

क्या है पीवी नरसिम्हा राव बनाम CBI?

साल 1991 में कांग्रेस की केंद्र में सरकार बनी। उस समय प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पीवी नरसिम्हा राव बैठै। अब हुआ यूं कि जुलाई 1993 के मॉनसून सत्र के दौरान राव की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। शिबू सोरेन और उनकी पार्टी के 4 विधायकों पर आरोप लगा कि उन्होंने वोट के बदले नोट लेकर अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वोटिंग की। इस मामले की जांच CBI को सौंपी गई। उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 1998 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। वहां 3:2 जजों की सहमति से संविधान के अनुच्छेद 105(2) के तहत उन्हें कानूनी कार्रवाई से मिली छूट का हवाला देते हुए इस मामले ही को रद्द कर दिया गया। अदालत ने कहा तब कहा कि अनुच्छेद 105(2) और अनुच्छेद 194(2) का मकसद ही ये है कि संसद और राज्य की विधानसभाओं के सदस्य बगैर किसी चिंता या डर के स्वतंत्र माहौल में भाषण या फिर वोट डाल सकते हैं। इस फैसले से शिबू सोरेन को और उनकी पार्टी को बड़ी राहत मिली। सभी आरोपियों को मुकदमे से रिहा कर दिया गया।

सीता सोरेन को क्यों लगा कोर्ट से झटका?

साल 2012 में सीता सोरेन ने राज्यसभा चुनाव में पैसे लेकर में वोट दिया। सीता सोरेन रिश्ते में हेमंत सोरेन के बड़े भाई की पत्नी है। शिबू सोरेन उनके ससूर हैं। पैसे लेकर में वोट मामले में सीता सोरेन पर आपराधिक मामले में केस दर्ज हुआ। उन्होंने केस को रद्द करने के लिए रांची हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लेकिन हाई कोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। साल 2023 में सीता सोरेन ने अपने ससुर के 1998 के फैसले का हवाला दिया। उस समय कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद इस मामले की आज हुई सुनवाई में 1998 में जहां कोर्ट के जजों का संख्या 3:2 थी वहीं आज ये बढ़कर 7 हो गई। कोर्ट ने कहा कोई भी सांसद और विधायक रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमें से बच नहीं सकता। इसी के साथ आज कोर्ट ने आज ये भी कहा कि साल 1998 का कोर्ट का फैसला गलत था।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "X" पर आज ट्वीट कर इस फैसले की प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कहा- "स्वागतम माननीय सर्वोच्च न्यायालय का एक महान निर्णय जो स्वच्छ राजनीति सुनिश्चित करेगा और व्यवस्था में लोगों का विश्वास गहरा करेगा।"

महुआ मोइत्रा पर भी लगा था भ्रष्टाचार का आरोप

वोट के बदले नोट के मामले में अबतक सांसदों और विधायकों को छुट मिलती हुई आई है। TMC पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा पर भी केश फॉर क्वीरी मामले में सांसद की सदस्यता छिन ली गई। मोइत्रा पर विजनेसमैन हिरानंदानी से पैसे लेकर संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के खिलाफ सवाल पूछने के मामले में मुकदमा चला था।

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