Article 370: सुप्रीम कोर्ट में आज से हर रोज आर्टिकल 370 पर होगी सुनवाई, 5 जजों की संविधान पीठ करेगी बैठक

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट आज बुधवार (2 अगस्त) से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
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नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज डेस्क। सुप्रीम कोर्ट आज बुधवार (2 अगस्त) से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इस ममले की सुनवाई CJI डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ करेगी। इस पीठ में चीफ जस्टिस के अलावा न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत भी शामिल हैं।

सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर होगी सुनवाई

आपको बता दें पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा था कि सुनवाई सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर दैनिक आधार पर होगी। क्योंकि सोमवार और शुक्रवार शीर्ष अदालत में विविध मामलों की सुनवाई का दिन होता हैं। इन दिनों में केवल नई याचिकाओं पर ही सुनवाई की जाती है और नियमित मामलों की सुनवाई नहीं की जाती है। पीठ ने कहा था कि पांच अगस्त 2019 की अधिसूचना के बाद पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर की स्थिति के संबंध में केंद्र की ओर से सोमवार को दाखिल हलफनामे का पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा संवैधानिक मुद्दे पर की जा रही सुनवाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

मामले की विवरणिका दाखिल करने के लिए 27 जुलाई की समय सीमा

पीठ ने 11 जुलाई को विभिन्न पक्षों द्वारा लिखित दलीलें और मामले की विवरणिका (कन्वीनिएंस कम्पाइलेशन) दाखिल करने के लिए 27 जुलाई की समय सीमा तय की थी। न्यायालय ने विवरणिका तैयार करने और इसे 27 जुलाई से पहले दाखिल करने के लिए याचिकाकर्ताओं और सरकार की तरफ से एक-एक वकील को नियुक्त किया था और यह स्पष्ट कर दिया कि उक्त तिथि के बाद कोई भी दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जाएगा। एक विवरणिका अदालत को पूरे मामले का सार-संक्षेप देती है ताकि तथ्यों को शीघ्रता से समझने में सहायता मिल सके।

2019 में खत्म हुआ था विशेष राज्य का दर्जा

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार ने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था और जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों- 1. जम्मू और कश्मीर, 2. लद्दाख- में विभाजित कर दिया था। केंद्र के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं, जिसे 2019 में संविधान पीठ के पास भेज दिया गया था।

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