नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश में कई विपक्ष के नेताओं और मुख्यमंत्रियों की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिफ्तारी के बाद चर्चा में आए ‘प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए) पर आज गुरुवार (19 मई) को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला ले लिया है। अदालत ने इस मामले को लेकर की जाने वाली गिरफ्तारियों पर बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पीएमएलए कानून के प्रावधानों के तहत अगर विशेष अदालत ने शिकायत पर स्वतः संज्ञान ले लिया है तो फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती। ईडी को गिरफ्तारी के लिए विशेष अदालत में आवेदन देना होगा।
क्या है इसका मतलब?
‘प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए) को लेकर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अगर हम असान भाषा में समझे ते इसको लेकर कोर्ट का कहना है कि अगर विशेष अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत का स्वतः संज्ञान ले लिया है तो ईडी पीएमएलए के सेक्शन 19 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। इसके लिए ईडी को पहले विशेष अदालत में आवेदन देना होगा। आवेदन से संतुष्ट होने के बाद ही अदालत, ईडी को आरोपी की हिरासत देगी।
जमानत पाने के लिए पीएमएलए में दी गई कड़ी शर्त लागू नहीं होगी
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि जिस आरोपी को ईडी ने जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया, उस पर जमानत पाने के लिए पीएमएलए में दी गई कड़ी शर्त लागू नहीं होगी। पीठ ने आगे कहा कि जब अदालत की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद ईडी आरोपी को समन जारी करे और वह पेश हो जाए, तो उसे बेल मिल जाएगी। और उस पर धारा 45 में दी गई जमानत की दोहरी शर्त लागू नहीं होगी। कोर्ट में चार्जशीट पेश करने के बाद अगर ईडी ऐसे आरोपी को गिरफ्तार करना चाहती है, तो कोर्ट से अनुमति लेनी होगी।
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