SC के निर्देश पर ECI लाया था ईवीएम में NOTA का विकल्प, इसे मजबूत बनाने की जरुरत, मतदाता हुए निराश

NOTA: वोट डालते वक्त आपने नोटा का बटन भी देखा होगा, जिसका उद्देश्य यह है कि अगर आपको मतदान के समय कोई भी प्रत्याशी योग्य नहीं लगता है तो आप NOTA(नोटा) का बटन दबा सकते हैं।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। वोट डालते वक्त आपने नोटा का बटन तो देखा ही होगा। जिसका उद्देश्य यह है कि अगर आपको मतदान के समय कोई भी प्रत्याशी योग्य नहीं लगता है तो आप NOTA(नोटा) का बटन दबा सकते हैं। लेकिन किस उद्देश्य से नोटा को लाया गया था वो केवल कागजी शेर ही साबित हो रहा है। एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार बीते पांच वर्षो में राज्य विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में दोनों को मिलाकर NOTA(नोटा) को 1.29 करोड़ से अधिक वोट मिले हैं। लेकिन नोटा दोनों चुनावों में आपराधिक रिकार्ड वाले उम्मीदवारों की संख्या में कमी नहीं कर पाया है। बल्कि इस रिपोर्ट के अनुसार आपराधिक रिकार्ड वाले उम्मीदवारों की संख्या बढ़ी ही है। इस वृद्धि से साफ साफ पता चल रहा है कि नोटा का कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

SC के निर्देश पर ही चुनाव आयोग ने NOTA(नोटा) के बटन का विकल्प दिया

सर्वोच्च न्यायालय ने सितंबर 2013 में चुनाव आयोग को बैलेट पेपर / ईवीएम में वर्तमान और भविष्य के परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए जरूरी प्रविधान करने के आदेश दिए थे। जिससे चुनाव में अयोग्य उम्मीदवारों की स्थिति में मतदाता किसी को भी वोट न देने का फैसला कर सके। माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही चुनाव आयोग ने NOTA(नोटा) के बटन का विकल्प मतदाताओं के लिए दिया।

मतदाता को लगता है कि नोटा चुनने का कोई महत्व नहीं है

एक्सिस इंडिया के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने नोटा को मजबूत बनाने को लेकर बहुत ही बढ़िया सुझाव दिया है, जिसको अमल करके नोटा को मजबूत बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि नोटा से कम वोट पाने वाले को दोबारा चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलना चाहिए। उनका कहना है कि अभी इस तरह का कोई नियम नहीं है। जिससे मतदाता को लगता है कि नोटा चुनने का कोई महत्व नहीं है। सही में अगर नोटा को मजबूत बनाना है तो इसमें बदलाव करने की जरुरत है।

फार्म 49- ओ भरने वाले मतदाता की पहचान गोपनीय नहीं रहती थी

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से पहले जो भी मतदाता चुनाव में उम्मीदवारों को अयोग्य पाता था तो वह फार्म 49- ओ को भरने का विकल्प चुन सकता था। जिसको उसे मतदान केंद्र में भरना होता था। इसका सबसे निगेटिव बात यह थी कि फार्म 49- ओ भरने वाले मतदाता की पहचान गोपनीय नहीं रहती थी।

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