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Bihar Politics: कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर नीतीश कुमार के बदले सुर, PM को कहा थैंक्स; परिवारवाद पर साधा निशाना

New Delhi: जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर CM नीतीश कुमार ने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने पर PM मोदी को धन्यवाद दिया है। उन्होंने परिवारवाद राजनीति पर भी नाम न लेते हुए हमला किया है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज जननायक कर्पूरी ठाकुर की 100वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान आज उन्होंने रैली भी निकाली। 2005 में जब बिहार में नीतीश कुमार की सरकार बनी थी। तब से ही नीतीश सरकार जननायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की वकालत करते हुए आए हैं। मंगलवार को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु ने महान् नायक कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की औपचारिक घोषणा की। नीतीश कुमार ने इस बात का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया।

परिवारवाद पर नीतीश का हमला

जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर आज बिहार में सियासी हलचलें बढ़ गई। प्रधानमंत्री मोदी ने आज कर्पूरी ठाकुर के परिवार में फोन करके उनसे बात की। इसकी नीतीश कुमार ने खुशी जताई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक ओर प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देकर अपने रास्ते NDA की गठबंधन की ओर कदम बढ़ाने की ओर संकेत दिए हैं। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से JDU और RJD में राजनीतिक तनाव देखने को मिला है। आज नीतीश कुमार ने किसी का नाम न लेते हुए परिवारवाद की राजनीति पर प्रहार किया।

इस मौके पर RJD का एक भी नेता मौजुद नहीं था। इससे कहीं न कहींं यह साफ है कि नीतीश कुमार RJD पर हमला कर रहे थे। क्योंकि RJD प्रमुख लालू यादव ने शुरुआत से परिवारवाद की राजनीति की है। पहले उन्होंने अपनी पत्नी रेवाड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया। वह खुद भी बिहार के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। आज उनके बेटे तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम की कुर्सी संभाल रहे हैं।

जननायक कर्पूरी ठाकुर का इतिहास

जननायक कर्पूरी ठाकुर ने हमेशा 'मैं नहीं हम' को अपने जीवन का आधार बनाया। उन्होंने बिहार में पिछड़ो और अति पिछड़ों को आरक्षण दिया। महिलाओं को भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए 3% कोटा रखा। अपने राजनीतिक काल में उन्होंने कई अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और विकास की परियोजनाएं जनता को सौपीं। कर्पूरी ठाकुर के लोकनायक जयप्रकाश नारायण से अच्छे संबंध थे। वह राष्ट्रवादी और गांधीवादी विचार धाराओं से प्रेरित थे। उन्होंने बिहार में अंग्रेजी की जगह हिंदी पर जोर दिया। स्वतंत्रता आंदोलन के समय उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई बीच में छोड़कर 1942 में गांधी जी की 'भारत छोड़ों आंदोलन' में शामिल हो गए थे। इसके लिए वह 26 महीनों तक जेल में बंद रहे।

कर्पूरी ठाकुर को क्यों कहा जाता है गुरु?

आज के नेता फिर चाहे वो नीतीश कुमार हो लालू प्रसाद यादव हो या स्वर्गीय रामविलास पासवान हो कर्पूरी ठाकुर ने कभी किसी को शिक्षा देने में पीछे नहीं हटे। कर्पूरी ठाकुर के अंडर में इन नेताओं का राजनीतिक करियर उभरा। उन्होंने सभी को एक समान माना और सभी को योग्यता साबित करने का मौका दिया। उन्हीं के कारण आज बिहार में इन नेताओं का बोलबाला है।

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