Lok Sabha Election:कभी कांग्रेस का था जमाना, आज छोटे-छोटे दल दे रहे ताना! जानें क्या सबसे बुरे दौर में है INC?

New Delhi: देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी 2014 लोकसभा चुनाव में बुरी हार के बाद सिमटती जा रही है। वहीं भारतीय राजनीति में BJP हाथी का विक्राल रुप ले रही है।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। देश की सबसे बड़ी और पुरानी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय पार्टी से सिमट कर क्षेत्रीय पार्टी बनते जा रही है। आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उत्तर प्रदेश से सिर्फ 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, वो भी गठबंधन में। उत्तर प्रदेश को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, अपने ही गढ़ से कांग्रेस बाहर निकल गई है।

क्यों है कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश इतना खास?

भारत में ब्रिटिश शासन में कांग्रेस की स्थापना 1985 में ए.ओ. ह्यूम ने की थी। आज के समय में कांग्रेस पार्टी पर सत्ता की हक रखने वाले गांधी परिवार का कहना है कि 'कांग्रेस नेताओं ने देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई। गांधी परिवार के दो सदस्य पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनको बेटे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी। इसमें कोई शक नहीं। गांधी परिवार से बनने वाले सभी प्रधानमंत्री यहां तक कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु भी उत्तर प्रदेश के फूलपुर से सांसद थे यहीं से वो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे। इसके बाद देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शाश्त्री जो कि गांधी परिवार के सदस्य नहीं थे वह भी उत्तर प्रदेश से ही सांसद थे। यहां तक कि देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी रायबरेली से सांसद बनी। धीरे-धीरे कांग्रेस की गाड़ी आगे बढ़ी और कांग्रेस का हर प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश में सांसद बनता गया। कांग्रेस की सत्ता की बागडोर संभालने वाली सोनिया गांधी अपनी सास के नक्शे कदम पर रायबरेली से ही लोकसभा सांसद बनीं।

कांग्रेस 17 सीटों पर उत्तर प्रदेश में लड़ेगी लोकसभा चुनाव

उत्तर प्रदेश में अपना वर्चस्व गढ़ने के बावजुद भी आज की कांग्रेस पार्टी अपने औदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) से हार गई है। 1951 में देश में जब पहली बार लोकसभा चुनाव हुए तब BJP को 80 में से सिर्फ 2 सीटें मिलीं। उस समय कांग्रेस ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की। अब से 40 साल पहले कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में 400 सीटें पार कर इतिहास रच दिया था। आगामी लोकसभा चुनाव में BJP 400 सीटें जीतने का दावा पेश कर रही है। वहीं आज कांग्रेस 17 सीटों पर लोकसभा चुनाव 2024 लड़ रही है वो भी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में शामिल होकर।

इंडिया अलाइंस और कांग्रेस

साल 2023 में नीतीश कुमार ने मोदी सरकार के खिलाफ देश के सभी विपक्षी दलों को एक किया जिसमें कांग्रेस पार्टी ने मुख्य भूमिका निभाई। इंडिया गठबंधन में पूर्व से लेकर पश्चिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक कुल 38 पार्टियां शामिल हुईं। लेकिन ये साथ ज्यादा दिन नहीं चला। कांग्रेस सीट बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं कर रही थी, कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यकक्षता में राहुल गांधी की "भारत जोड़ों न्याय यात्रा" को ज्यादा महत्वता दी गई। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन तोड़कर बंगाल में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया। धीरे-धीरे इंडिया गठबंधन के साथ एक-एक कर पार्टियां छोड़ने पर मजबूर हो गईं। इस बीच बिहार में खेला हो गया, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू यादव के साथ गठबंधन तोड़कर वे खुद BJP के पाले में चले गए। नीतीश कुमार BJP के नेतृत्व में NDA में शामिल हो गए।

BJP के सत्ता में आने की है संभावना

कांग्रेस पार्टी पिछले 10 सालों से सत्ताधारी से विपक्षधारी बन गई है। गठबंधन में चुनाव लड़ने के लिए मजबूर हो गई है। आज छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियां कांग्रेस को सीट दे रही है। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने खींचातानी करके कांग्रेस को 17 सीटें देनें पर सहमति बनाई है। पंजाब और दिल्ली में आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ना चाहती है। आज क्षेत्रीय पार्टी भी कांग्रेस को अंगूठा दिखा रही हैं। हाल के दिनों में कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया है। इस बार BJP के सत्ता में आने का पूरा संभावना है, ऐसे में कांग्रेस BJP को कैसे टक्कर देगी यह तो राहुल गांधी ही जानें। क्योंकि "भारत जोड़ों न्याय यात्रा" में लोगों की भीड़ जमा तो होती है मगर चुनाव के समय ये आंकड़ा काफी कम हो जाता है।

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