नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। ग्वालियर की राजमाता माधवी राजे सिंधिया का आज खराब स्वास्थ्य के चलते दिल्ली के AIIMS अस्पताल में निधन हो गया। उनके बेटे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके पोते आर्यमन सिंधिया अपना सब काम छोड़कर माधवी राजे को कंधा देने गए हैं। उनके पति माधवराव सिंधिया कांग्रेस के दिग्गज नेता थे। माधवी राजे कई महीनों से बीमार थीं। उन्होंने वेंटिलेटर पर आखिरी सांस ली।
राजघराने से था ताल्लुक
आपको बता दें कि माधवी राजे राजघराने से ताल्लुक रखती थीं। वह ग्वालियर की राजमाता के नाम से जानी जाने वाली विजया राजे सिंधिया की बहू थीं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और केंद्र में मंत्री रहे माधवराव सिंधिया उनके पति थे। इन दोनों की शादी 1966 को दिल्ली में बड़े धूमधाम से हुई थी। माधवराव सिंधिया ग्वालियर से अपनी बारात लेकर दिल्ली गए थे। शादी के बाद कुछ समय तक माधवी राजे और उनके पति माधवराव सिंधिया इंग्लैंड चले गए क्योंकि उस समय माधवराव सिंधिया ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में के छात्र थे। 1967 में दोनों की पहली संतान हुई उनका नाम चित्रांगदा सिंह है। उसके बाद दोनों भारत लौट आए। उसके बाद वह ग्वालियर के जय विलास पैलेस में अपने पति के साथ रहने लगी। साल 1971 को मुंबई में ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म हुआ। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उनकी ननद हैं। ये तो हो गई उनके ससुराल की बात, अब बात करते हैं उनके मायके की। माधवी राजे नेपाल के राजपूत राजघराने से थीं। उनका मायका का नाम प्रिसेंज किरण राज्य लक्ष्मी देवी था। उनके दादा शमशेर जंग बहादुर नेपाल के प्रधानमंत्री थे।
पति कांग्रेसी, बेटा भाजपाई
जिस तरह हर किसी की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं। वैसे ही माधवी राजे की जिंदगी में भी एक ऐसा ही समय आया। साल 2001 में उनके पति माधवराव सिंधिया की विमान हादसे में मौत हो गई। उनकी मौत से न केवल घर में सन्नाटा छाया जबकि, कांग्रेस पार्टी को भी गहरा सदमा लगा। अपने पति की मौत के बाद वे अकेली हो गई। फिर वे अपने बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया और बहू प्रियादर्शनी राजे के साथ रहने लगी। पिता की मृत्यु के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने परिवार के राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए राजनीति में सक्रिय हो गए। उन्होंने भी कांग्रेस पार्टी से अपनी राजनीति का पारी शुरु की। बीते सालों में पार्टी से हुए मतभेद के बाद उन्होंने 2020 में बीजेपी का दामन थाम लिया। वर्तमान में वे केंद्र की बीजेपी सरकार में वे केंद्रीय मंत्री हैं। बीजेपी ने उन्हें गुना लोकसभा सीट से 2024 के आम चुनाव का टिकट दिया है। 7 मई को तीसरे चरण में मतदान हुआ। 4 जून को उनके भाग्य का फैसला होगा।
सास से कैसा था संबंध?
माधवी राजे ने अपने जीवन में कई लोगों की सेवा में अपना योगदान दिया। उन्होंने एक समाज सेविका के रुप में भी काम किया। माधवी राजे 24 धर्मार्थ ट्रस्टों की अध्यक्ष थीं जो शिक्षा और चिकित्सा देखभाल जैसे क्षेत्रों में काम किया करती है। उन्होंने अपने दिवंगत पति माधवराव सिंधिया की याद में महल संग्रहालय में गैलरी भी बनवाई है। माधवी राजे की सास विजया राजे भारतीय जनसंघ की संस्थापक थीं। ऐसा माना जाता है कि माधवी राजे का उनकी सास राजमाता विजया राजे से शुरुआत में अच्छा संबंध था। लेकिन बाद में दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं। राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब द हाउस ऑफ सिंधियाज- ए-सागा ऑफ पॉवर, पॉलिटिक्स एंड इन्ट्रीग में विजया राजे और माधवराव के संबंधों के बारे में उल्लेख किया गया है। इस किताब में लेखक ने लिखा है कि विजया राजे और माधवराव सिंधिया के बीच खराब हुए संबंध का कारण विजया राजे अपनी बहू माधवी राजे को मानती थीं। जबकि माधवराव मां और बेटे के बीच दूरी की वजह सरदार आंगरे को मानते थे। इंडिया टुडे के 30 सितंबर, 1991 के अंक में डॉमेस्टिक बैटल बिटवीन विजय राजे एंड माधवराव सिंधिया के अनुसार, माधवराव और विजया राजे के संबंध 1972 में खराब होने लगे थे। जब उन्होंने अपनी मां की पार्टी जनसंघ छोड़कर कांग्रेस में जाने की इच्छा जाहिर की थी।
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