नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज। सोमवार 2 दिसंबर को किसान संगठन एक बार फिर सड़क पर उतर आए। किसान नोएडा और ग्रेटर नोएडा से दिल्ली की ओर मार्च कर चुके हैं। भारतीय किसान परिषद (BKP) के नेता सुखबीर खलीफा ने इस मार्च की घोषणा की थी। वे नए कृषि कानूनों के तहत मुआवजे और लाभ की मांग कर रहे हैं। उनका उद्देश्य नए कृषि कानूनों के तहत मुआवजा और लाभ प्राप्त करना है। किसान महामाया फ्लाईओवर से बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ चुके हैं और दलित प्रेरणा स्थल पर धरने पर बैठ गए हैं।
किसान संगठनों की और भी योजनाएं
किसान मजदूर मोर्चा (KMM) और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) जैसे संगठन भी 6 दिसंबर से दिल्ली की ओर पैदल मार्च करेंगे। इन संगठनों का मुख्य उद्देश्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी और अन्य अधिकारों की मांग करना है।
हरियाणा के कृषि मंत्री का विरोध
हरियाणा के कृषि मंत्री श्यान सिंह राणा ने किसानों के मार्च की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि किसानों के पास कोई वैध मुद्दा नहीं है क्योंकि तीन कृषि कानूनों को पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रद्द कर दिया था। श्यान सिंह ने यह भी कहा कि पिछले आंदोलन से पंजाब को बहुत नुकसान हुआ है और अब किसानों को अपनी समस्याओं का समाधान अपने मुख्यमंत्री से बात करके करना चाहिए।
किसान मार्च से यातायात पर पड़ रहा है असर
किसानों के इस मार्च के कारण दिल्ली की ओर जाने वाले रास्तों पर यातायात प्रभावित हो रहा है। गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने सोमवार को बैरिकेड्स लगाने और वाहनों की जांच करने का निर्णय लिया है। पुलिस ने यातायात में परेशानी से बचने के लिए मेट्रो का उपयोग करने की सलाह दी थी और कुछ मार्गों को डायवर्ट भी किया गया है।
किसान संगठन के मांगों की लंबी सूची
किसान आंदोलन के दौरान किसान संगठन ने कई मांगें उठाई हैं जिनमें MSP पर कानूनी गारंटी, कृषि कर माफी, पेंशन, और लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय शामिल हैं। ये सभी किसान आंदोलन का मुख्य कारण हैं और किसानों का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं उनका आंदोलन जारी रहेगा।





