Farmer Protest: फिर क्यों भरी किसानों ने आंदोलन की हुंकार? क्या इस बार भी भारी पड़ेंगे मोदी पर किसान?

New Delhi: किसान आंदोलन ने एक बार फिर राजधानी दिल्ली में आने के लिए मार्च शुरु कर दिया है। आज दिल्ली के बॉर्डर को प्रशासन ने सील कर दिया है। दिल्ली में 1 महीने के लिए धारा-144 लागू कर दिया है।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। राजधानी दिल्ली में 1 महीने के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने किसानों के ‘दिल्ली चलो’ अभियान को देखते हुए सख्ती शुरू कर दी है। इसी क्रम में सिंघू बॉर्डर, गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। रविवार की रात इन सभी बॉर्डर पर निरीक्षण के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने सभी बॉर्डर पर किसानों को रोकने के लिए कंक्रीट के अवरोधक और सड़क पर बिछाए जाने वाले लोहे के नुकीले अवरोधक लगाकर किलेबंदी की है।

MSP का है मुद्दा

सामान्य वाहनों को भी सोमवार की सुबह से काफी जांच पड़ताल के बाद दिल्ली की सीमा में प्रवेश दिया जा रहा है। उप्र, हरियाणा और पंजाब के ज्यादातर किसान संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी की मांग को लेकर दिल्ली चलो का आह्वान किया है। इस मांग को लेकर मंगलवार को किसान दिल्ली की ओर चल पड़ेंगे। किसानों का दावा है कि 2021 में आंदोलन वापस लेने के लिए जिन शर्तों पर राजीनामा हुआ था, उसमें MSP भी एक मुद्दा था।

दिल्ली पुलिस द्वार जारी की गई एडवाइजरी

सरकार को इस संबंध में कानून बनाना था लेकिन सरकार ने अब तक कुछ नहीं किया। ऐसे में किसानों ने एक बार फिर सड़क पर उतरने का फैसला किया है। किसानों के इस आह्वान को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा ने रविवार की रात सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने निकले। उन्होंने हरियाणा और उप्र से लगती सीमा का दौरा करने के बाद निषेधाज्ञा लागू करने का फैसला किया। इस फैसले के तहत दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि सोमवार से सिंघू बॉर्डर पर वाणिज्यिक वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित होगा। दिल्ली पुलिस ने एक्स पर अहम दिशा निर्देश जारी किए हैं।

क्या हुआ था किसान आंदोलन 2021 में?

5 जून, 2020- भारत सरकार ने तीन कृषि विधेयकों को प्रख्यापित किया जो कि मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, 2020 पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2020, और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020। ये तीन विधेयक भारत में कृषि क्षेत्र को सरकार द्वारा संचालित क्षेत्र से निजी क्षेत्र की ओर धकेलते हैं।

14 सितंबर, 2020: संसद में किसान विधेयक बिल लाया गया।

17 सितंबर, 2020: लोकसभा में पारित हुआ बिल

20 सितंबर, 2020: किसान बिल राज्यसभा में ध्वनि मत से पारित हुआ

24 सितंबर, 2020: पंजाब में किसानों ने तीन दिवसीय रेल रोको की घोषणा की

25 सितंबर, 2020: अखिल भारतीय किसान संघर्ष (AIKSCC) समन्वय समिति के आह्वान पर पूरे भारत में किसान सड़कों पर उतरे।

25 सितंबर, 2020: 3 नवंबर को देशव्यापी सड़क नाकाबंदी सहित नए कृषि कानूनों के खिलाफ छिटपुट विरोध प्रदर्शन के बाद, पंजाब और हरियाणा में किसान संघों ने 'दिल्ली चलो' आंदोलन का आह्वान किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कोविड-19 प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए राजधानी शहर तक मार्च करने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।

27 सितंबर, 2020: कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति की सहमति मिल जाती है और भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर दिया जाता है और वे कृषि कानून बन जाते हैं।

26 नवंबर, 2020: दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों को हरियाणा के अंबाला जिले में पुलिस द्वारा तितर-बितर करने की कोशिश के दौरान पानी की बौछारों, आंसू गैस का सामना करना पड़ा। बाद में पुलिस ने उन्हें उत्तर-पश्चिम दिल्ली के निरंकारी मैदान में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति दी।

28 नवंबर, 2020: गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों के साथ बातचीत करने की पेशकश की। हालांकि, किसानों ने जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की मांग करते हुए उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

8 दिसंबर, 2020: भारतीय किसान यूनियन ने भारत बंद का आह्वाहन किया।

11 दिसंबर, 2020: भारतीय किसान यूनियन ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

16 दिसंबर, 2020: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह विवादित कृषि कानूनों पर गतिरोध खत्म करने के लिए सरकार और किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों वाला एक पैनल गठित कर सकता है।

4 जनवरी, 2021: सरकार और किसान नेताओं के बीच वार्ता भी बेनतीजा रही, जिसमें केंद्र कृषि कानूनों को निरस्त करने पर सहमत नहीं हुआ।

7 जनवेरी, 2021: सुप्रीम कोर्ट नए कानूनों को चुनौती देने वाली और विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ याचिकाओं पर 11 जनवरी को सुनवाई करने पर सहमत हुआ। यह तब हुआ जब अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत को बताया कि किसानों और केंद्र के बीच बातचीत काम कर सकती है।

26 जनवरी, 2021: गणतंत्र दिवस पर कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर किसान यूनियनों द्वारा 26 जनवरी को बुलाई गई ट्रैक्टर परेड के दौरान हजारों प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए। सिंघू और गाज़ीपुर के कई प्रदर्शनकारियों ने अपना मार्ग बदलने के बाद, मध्य दिल्ली के आईटीओ और लाल किले की ओर मार्च किया, जहां पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया, जबकि कुछ किसानों ने सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की और पुलिस कर्मियों पर हमला किया। लाल किले पर प्रदर्शनकारियों का एक वर्ग खंभों और दीवारों पर चढ़ गया और निशान साहिब का झंडा फहराया। इस अफरा-तफरी में 1 प्रदर्शनकारी की मौत हो गई।

05 मार्च, 2021: पंजाब विधानसभा ने किसानों और पंजाब के हित में कृषि कानूनों को बिना शर्त वापस लेने और खाद्यान्नों की एमएसपी-आधारित सरकारी खरीद की मौजूदा प्रणाली को जारी रखने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया।

27 मई, 2021: किसानों ने आंदोलन के महीने पूरे होने पर 'काला दिवस' मनाया और सरकार के पुतले जलाए। हालांकि तीनों सीमाओं पर भीड़ कम हो गई है, लेकिन किसान नेताओं ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन 2024 तक जारी रहेगा। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी दोहराया कि 3 कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने के बाद ही किसान विरोध प्रदर्शन बंद करेंगे।

3 अक्टूबर 2021: उत्तर प्रदेश के लखीमपुल खीरी में BJP सांसद के बेटे ने धरने पर बैठे किसानों पर अपनी गाड़ी चला दी जिसमें 8 लोगों की मौत हो गई।

19 नवंबर, 2021: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की। राष्ट्र के नाम एक संबोधन में कहा कि "मैं आज देशवासियों से क्षमा मांगते हूं, सच्चे मन से और पवित्र हृदय से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्या में ही कोई कमी रहेगी। जिसके कारण दिए के प्रकाश जैसा सत्य, कुछ किसान भाइयों को हम समझ नहीं पाए।" आज गुरु नानक देव जी का पवित्र प्रकाश पर्व है। हां समय किसी को भी दोष देने का नहीं है (मैं आज देशवासियों से माफ़ी मांगते हुए सच्चे और पवित्र मन से कहना चाहता हूं कि शायद हमारे प्रयासों में कुछ कमी रही होगी। जिसके कारण हम सच्चाई को समझा नहीं सके) कुछ किसानों के लिए दीपक की रोशनी की तरह)।

29 नवंबर, 2021: संसद के दोनों सदनों ने कृषि कानून निरसन विधेयक, 2021 को बिना किसी चर्चा के ध्वनि मत से मंजूरी दे दी।

इसके बाद किसान आंदोलन पर विराम लग गया। 1 साल से ज्यादा किए संघर्ष के बाद पंजाब, पश्चिम उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आए किसान अपने घर वापस लौटे।

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