नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। मशहूर शायर मुनव्वर राणा का रविवार शाम कार्डियक अरेस्ट आने से निधन हो गया। मुनव्वर ने 71 साल की आयु में आखिरी सांस ली। जानकारी के मुताबिक वह पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई के आईसीयू वार्ड में चल रहा था। मुन्नवर राणा की हिंदी अवधी उर्दू भाषा में कई रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें साल 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि देश में असहिषुणता का आरोप लगाते हुए उन्होंने अपना अवार्ड सरकार को वापस कर दिया था। मुनव्वर राणा का जन्म 26 नवंबर 1952 को रायबरेली में हुआ था।
पिछले साल बिगड़ी थी तबीयत
मुन्नवर राणा की पिछले साल यानी 2023 के मई महीने में हालत काफी बिगड़ गई थी। जिसके बाद उन्हें लखनऊ के अपोलो अस्पताल में लाइव सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। उस समय राणा के गॉल ब्लैडर का ऑपरेशन हुआ था। जिसके बाद से उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। हालांकि, उस समय वह ठीक हो गए थे। वहीं पिछले दिनों किडनी से संबंधित परेशानियों के बाद उन्हें एसपीजीआई में भर्ती कराया गया था। यहां वह आईसीयू वार्ड में भर्ती थे। जिसके बाद रविवार देर रात 11: 30 बजे के आसपास उन्होंने अंतिम सांस ली। और दुनिया को अलविदा कह दिया।
मां की रचनाओं से हुए प्रसिद्ध
रायबरेली में जन्मे मशहूर शायर मुनव्वर राणा को साल 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। राणा की मां पर लिखी अपनी रचनाओं से देश-विदेश में खूब प्रसिद्धि मिली थी। शायर मुनव्वर राणा जितने ज्यादा मशहूर रहे उतने ही विवादों से भी घिरे रहे हैं। उन्होंने पिछले साल वाल्मीकि समुदाय की तुलना तालिबान से की थी। जिसके बाद देश मे बवाल मच गया था। इतना ही नहीं राम मंदिर का फैसला सुनाने वाले जज रंजन गोगोई को उन्होंने बिका हुआ बताया था। इसके बाद उन्होंने योगी आदित्यनाथ को लेकर कहा था कि अगर योगी आदित्यनाथ दोबारा चुनकर आते हैं तो वह यूपी छोड़ देंगे। लेकिन ऐसा उन्होंने कुछ नही किया।
मुन्नवर राणा की कुछ मशहूर शायरी
मां पर लिखी शायरी,
मामूली एक कलम से कहां तक घसीट लाए
हम इस ग़ज़ल को कोठे से मां तक घसीट लाए।
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई।
इस तरह मेरे गुनाहों को वह धो देती थी
मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है।
नेकियां गिनने की नौबत ही नहीं आएगी
मैंने जो मां पर लिखा है वही काफी होगा।
हम कुछ ऐसे तेरे दीदार में खो जाते है
जैसे बच्चे भरे बाजार में खो जाते हैं।
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