पतंजलि विज्ञापन मामला: कोर्ट की अवमानना से बेंच नाराज; बोले बालकृष्ण- अज्ञानता के कारण हुई भूल

आदेश के बावजूद पतंजलि ने जारी किए विज्ञापन। सुनवाई कर रही बेंच ने कहा था, पतंजलि ने जानबूझकर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है, 16 अप्रैल को होगी कार्यवाही। 22 अप्रैल तक मामला टला।
सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। पतंजलि विज्ञापन केस में मंगलवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच के सामने बाबा रामदेव और बालकृष्ण तीसरी बार पेश हुए।

बाबा रामदेव और बालकृषण की कोर्ट में सुनवाई

कोर्ट में रामदेव से जस्टिम हिमा कोहली ने कहा कि जिस चीज का आप प्रचार कर रहे हैं, हमारी संस्कृति में ऐसी कई चीजें हैं। लोग सिर्फ ऐलोपैथी नहीं, घरेलू पद्यतियां भी इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन आप अपनी पद्यतियों को बेहतर दिखाने के लिए दूसरों को खराब और रद्द करने को क्यों कह रहे हैं।

इसपर रामदेव ने जवाब देते हुए कहा कि उनका इरादा किसी को भी रद्द करने का नहीं था। साथ ही उन्होंने आयुर्वेद पर 5 हजार से ज्यादा रिसर्च प्रोटोकॉल किए हैं।

जस्टिस कोहली ने आदेश देते हुए कहा कि आप किसी को डाउन नहीं दिखा सकते। बीमारियों के लिए दवाओं की पब्लिसिटी की इजाजत नहीं है। ना फार्मेसी और ना डॉक्टर कर सकते हैं। आज तक ऐसी बीमारियों के लिए किसी ने भी प्रचार नहीं किया। यह बिल्कुल गैर-जिम्मेदार हरकत है।

मामले में बालकृष्ण ने कहा कि जो भी हुआ, वो अज्ञानता के कारण हुआ है। इस गलती के लिए वे क्षमाप्रार्थी हैं। जिसपर जस्टिस अमानतुल्लाह ने ऐलोपैथी पर कटाक्ष करने की उनकी हरकत को गलत बताया। रामदेव ने कोर्ट में तर्क दिया कि ऐलोपैथी को भी साइंस कहा गया है और इन दोनों शाखाओं के बीच विवाद चलता रहा है।

वहीं, जस्टिस कोहली ने कहा कि यह ना सोचें कि हम आपको या आपके इतिहास को माफ कर देंगे। इस कोर्ट के आदेश थे, तभ भी आपने अवहेलना की। जस्टिस कोहली ने कहा कि आपको आपकी गलती का अहसास नहीं हुआ है। अभी भी आप अपनी बात पर अड़े हैं। हम इस मामले को 23 अप्रैल को देखेंगे।

Supreme Court
Baba Ramdev 
Acharya Bal Krishna
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क्या है पूरा मामला?

10 जुलाई 2022 को पतंजलि ने एक विज्ञापन जारी किया। जिसमें एलोपैथी पर गलतफहमियां फैलाने का आरोप लगाया गया था। इसके खिलाफ 17 अगस्त 2022 को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई।

21 नवंबर 2023 को हुई सुनवाई में जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा था- पतंजलि को सभी भ्रामक दावों वाले विज्ञापनों को तुरंत बंद करना होगा। कोर्ट ऐसे किसी भी उल्लंघन को बहुत गंभीरता से लेगा और हर एक प्रोडक्ट के झूठे दावे पर 1 करोड़ रुपए तक जुर्माना लगा सकता है।

Indian Medical Association
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कोर्ट के आदेश के बाद भी पतंजलि ने जारी किए विज्ञापन

इससे पहले हुई सुनवाई में आईएमए ने दिसंबर 2023 और जनवरी 2024 में प्रिंट मीडिया में जारी किए गए विज्ञापनों को कोर्ट के सामने पेश किया। इसके अलावा 22 नवंबर 2023 को पतंजलि के CEO बालकृष्ण के साथ योग गुरु रामदेव की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बारे में भी बताया। पतंजलि ने इन विज्ञापनों में मधुमेह और अस्थमा को 'पूरी तरह से ठीक' करने का दावा किया था।

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court order given
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