नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण को लेकर हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार हुआ है, लेकिन यह अभी भी खतरनाक श्रेणी में बना हुआ है। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण ने सभी को चिंतित कर दिया है। यहां की हवा जहरीली बनी हुई है। सांस लेने में लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। वायु प्रदूषण से लोग कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
दरअसल, एक सप्ताह से अधिक समय तक ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में दर्ज होने के बाद शुक्रवार को दिल्ली में वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) शुक्रवार को 371 पर रहा, जो बहुत “खराब” श्रेणी में है। हालांकि राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों के लिए थोड़ी राहत की बात है। लेकिन अन्य शहरों की तुलना में दिल्ली आज देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। लखनऊ और पटना क्रमशः 367 और 249 AQI के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे, जो “बहुत खराब” श्रेणी में है। इस बीच, आइजोल और कर्नाटक का बागलकोट शुक्रवार को सबसे कम प्रदूषित रहा। आज सुबह 7 बजे दोनों शहरों में AQI क्रमशः 27 और 43 था।
गंगा के मैदानी इलाकों में तेजी से बढ़ा प्रदूषण
रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली के अलावा गंगा के मैदानी इलाकों में भी प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ा है खासतौर पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में। यहां भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक रहा। सर्दियों की शुरुआत, कम होते तापमान, कम होती हवाओं की स्पीड की वजह से प्रदूषण को बढ़ने में काफी मदद मिली। रेस्पिरर लिविंग साइंस के सीईओ और फाउंडर रौनक सुतारिया ने बताया हर साल नवंबर में प्रदूषण काफी तेजी से बढ़ता है। दिसंबर के मध्य और फरवरी में भी कई बार इसी तरह का पैटर्न देखने को मिलता है।
बढ़ता पलूशन सामान्य पैटर्न से अलग
रेस्पिरर लिविंग साइंसेज के संस्थापक और CEOरौनक सुतारिया ने बताया कि हर साल नवंबर के आसपास प्रदूषण के स्तर में उछाल सामान्य पैटर्न से काफी अलग है, जो आमतौर पर दिसंबर के मध्य से फरवरी के बीच ऐसे स्तर को देखता है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव न केवल एक असामान्य प्रवृत्ति को उजागर करता है, बल्कि आने वाले महीनों में हम जो सामना कर सकते हैं, उसके बारे में गंभीर चिंता भी पैदा करता है।
बाल के बराबर महीन कण फेफड़ों और खून में घुस रहे हैं
इसमें मुख्य प्रदूषक पीएम-2.5 था। ये 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले महीन कण होते हैं। इनकी चौड़ाई मोटे तौर पर मानव के बाल बराबर होती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार ये महीन कण सांसो के जरिए शरीर के अंदर जाकर फेफड़ों और खून में तक पहुंच जाते हैं। इससे लोगों को गंभीर तरह की बीमारियों का खतरा होता है। गंभीर प्रदूषण में वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन, औद्योगिक उत्पादन और पराली दहन से निकलता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्दियों के दौरान ठंडी के कारण ये कण जमीन के आसपास फसे रह जाते हैं।
प्रमुख शहरों में प्रदूषण का स्तर
आइजोल 27 अच्छा
अहमदाबाद 208 खराब
बेंगलुरु 118 मध्यम
भोपाल 248 खराब
भुवनेश्वर 171 मध्यम
चंडीगढ़ 198 मध्यम
चेन्नई 126 मध्यम
दिल्ली 371 बहुत खराब
गुवाहाटी 50 अच्छा
हैदराबाद 108 मध्यम
जयपुर 244 खराब
कोलकाता 186 मध्यम
लखनऊ 367 बहुत खराब
मुंबई 124 मध्यम
पटना 249 खराब
रायपुर 129 मध्यम
तिरुवनंतपुरम 57 संतोषजनक
घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनना आवश्यक
दिल्ली का वायु प्रदूषण वायु गुणवत्ता की स्थिति को देखते हुए जब भी लोग बाहर निकलें तो मास्क पहनना बेहद ज़रूरी है। वायु गुणवत्ता में अक्सर PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक स्तर के कण होते हैं, साथ ही नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें भी होती हैं। ये विषाक्त पदार्थ आसानी से श्वसन संबंधी समस्याओं, हृदय संबंधी समस्याओं और यहाँ तक कि अस्थमा या फेफड़ों के कैंसर जैसी दीर्घकालिक बीमारियों का कारण बन सकते हैं। मास्क पहनना विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियों वाले व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है।
खराब वायु गुणवत्ता से बचाता है मास्क
मास्क पहनने से हवा में मौजूद एलर्जीक और हानिकारक कणों के संपर्क में आने की संभावना काफी कम हो जाती है। आपके मुंह और नाक को ढककर, मास्क प्रदूषकों के खिलाफ एक अवरोध बनाता है। यह आपके द्वारा साँस में ली जाने वाली हवा की नमी और तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद करता है जिससे यह आपके श्वसन तंत्र पर कम कठोर हो जाती है।





