CAA: ममता-स्टालिन ने CAA को दिखाई लाल झंडी, नहीं होने देंगे राज्य में लागू, क्या होगा अगला कदम?

New Delhi: CAA देश में लागू होने के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने राज्य में CAA लागू न होने की बात कही है।
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Mamta Banerjee 
MK Stalin
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। केंद्र सरकार ने आखिरकार देश में CAA लागू कर ही दिया। इस बीच CAA कानून को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरु कर दिया है। कांग्रेस से लेकर TMC, CPI (M), DMK, AAP, PDP और AIMIM तक। ममता बनर्जी, एम के स्टालिन और पिनरायी विजयन ने अपने राज्य में CAA लागू करने से इंकार कर दिया है।

विपक्ष ने CAA का किया विरोध

केंद्र सरकार ने 11 मार्च को रमजान से ठीक एक दिन पहले देश में CAA कानून को लागू किया। इसपर विपक्ष ने सरकार का विरोध किया और कहा- BJP सरकार ने चुनाव से ठीक पहले यह कदम उठाया। यह कानून समाज में नफरत फैलाने का काम करेगा। इस कानून से किसी का भला नहीं होगा।

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हम किसी भी हाल में CAA को बंगाल में लागू नहीं होने देंगे। बंगाल में NRC डिटेंशन कैंप बनाने की अनुमति नहीं देंगे और न ही लोगों से उनके अधिकार छीनने की अनुमति देंगे। इसके लिए चाहे मेरी जान चली जाए।

केरल

केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने कहा कि हमारी सरकार ने बार-बार इस बात को दौहराया है कि केरल में CAA लागू नहीं होगा। ये मुस्लिम अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक मानता है। सांप्रदायिक रूप से विभाजनकारी इस कानून के खिलाफ पूरा केरल एकजुट होगा।

तमिलनाडु

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एक के स्टालिन ने कहा कि CAA विभाजनकारी है और इसे तमिलनाडु में लागू नहीं किया जाएगा। इससे किसी को फायदा नहीं होगा।

दिल्ली

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से शरणार्थी आकर देश में रहेंगे तो यहां के लोग कहां जाएंगे?

क्या किसी कानून को राज्य में लागू होने से रोका जा सकता है?

जब कोई भी कानून संविधान के दोनों सदन लोकसभा और राज्यसभा में पूर्ण बहुमत से पास हो जाता है। तब राष्ट्रपति की इसपर मुहर लगने जाती है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद बनाए गए कानून को पूरे देश में लागू किया जा सकता है। लेकिन अगर कोई राज्य केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून को राज्य में लागू नहीं करने देना चाहती तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। अगर सुप्रीम कोर्ट वैसे तो केंद्र सरकार के बनाए हुए कानून का उल्लंघन नहीं कर सकती है लेकिन किसी कारणवश अगर फैसला राज्य सरकार की ओर जाता है तो केंद्र द्वारा बनाया गया कानून उस राज्य में लागू होने से बच सकता है।

क्या है CAA?

केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी मुस्लिम-बहुल देशों से आए हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, बौद्धों, जैनियों और पारसियों के लिए भारतीय नागरिकता का मार्ग प्रदान करने के लिए नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करता है। 31 दिसंबर, 2014 तक भारत में प्रवेश करने वाले और अपने मूल देश में धार्मिक उत्पीड़न या भय या धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले शरणार्थियों को नागरिकता के लिए पात्र बनाया गया है।

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