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Monday, March 2, 2026
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एडमिट कार्ड विवाद: एपीजे स्कूल के प्रिंसिपल और मंत्री आशीष सूद की मिलीभगत? AAP के आशीष सूद पर गंभीर आरोप

एपीजे स्कूल और शिक्षा मंत्री आशीष सूद की आपसी रस्साकशी से बच्चों को विवाद के चलते मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। हालांकि बाद में एडमिट कार्ड जारी कर दिए।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली में एपीजे स्कूल के प्रिंसिपल और मैनेजर बच्चों के एडमिट कार्ड लेकर देर रात तक शिक्षा मंत्री आशीष सूद के घर में पाए गए, जिसे लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि शिक्षा मंत्री का स्कूल से क्या रिश्ता है और उन्होंने एडमिट कार्ड रोकने पर FIR क्यों नहीं कराई।

अभिभावकों से बढ़ी हुई फीस की मांग की

आप का आरोप है कि सोमवार को 10वीं बोर्ड की परीक्षा से पहले एपीजे स्कूल ने बच्चों के एडमिट कार्ड रोककर अभिभावकों से बढ़ी हुई फीस की मांग की। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यदि आशीष सूद सच में 18 लाख बच्चों के अभिभावक होते, तो ऐसे मामले में स्कूल पर तुरंत कानूनी कार्रवाई होती।

स्कूल ने छात्रों को प्रताड़ित किया। उन्होंने यह भी बताया कि अभिभावकों ने कई बार कानूनी फीस के चेक स्कूल को भेजे, लेकिन शिक्षा निदेशक और डिप्टी डायरेक्टर ने कोई कार्रवाई नहीं की। AAP का कहना है कि मंत्री और अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूल ने छात्रों को प्रताड़ित किया।

”ऊपर से फोन आएगा तो एडमिट कार्ड जारी करेंगे”

आप विधायक संजय झा और कुलदीप कुमार ने बताया कि प्रिंसिपल ने खुद माना कि ऊपर से फोन आएगा तो एडमिट कार्ड जारी करेंगे। इसका मतलब है कि एडमिट कार्ड रोकने और बच्चों की प्रताड़ना में मंत्री की जानकारी शामिल थी। देर रात तक चले AAP के धरने और संघर्ष के बाद बच्चों को अंततः उनके एडमिट कार्ड मिले।

”उन्होंने मीडिया और अभिभावकों से झूठ बोला”

कुलदीप कुमार ने शिक्षा मंत्री के दावे को खारिज किया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि 14 फरवरी से ही मंत्री को पूरा मामला पता था, लेकिन उन्होंने मीडिया और अभिभावकों से झूठ बोला।

इस लड़ाई को जब तक जरूरी होगा, जारी रखेंगे -आप

आप ने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ स्कूल की मनमानी नहीं है, बल्कि सरकार का संरक्षण भी इसमें शामिल है। बच्चे और अभिभावक इस मनमानी का खामियाजा भुगत रहे थे। AAP ने कहा कि भविष्य में किसी भी बच्चे को ऐसी मानसिक पीड़ा न झेलनी पड़े और वे इस लड़ाई को जब तक जरूरी होगा, जारी रखेंगे। इस घटना ने शिक्षा मंत्री और निजी स्कूलों के बीच संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह दिखाया कि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए लगातार सतर्क रहना कितना जरूरी है।

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