नई दिल्ली, रफ्तार न्यूज डेस्क। भारत के 11वें राष्ट्रपति और मिसाइल मैन ऑफ़ इंडिया के नाम से विख्यात डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को भला कौन भुला सकता है। इनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु में रामेश्वरम के छोटे से गांव धनुषकोड़ी में एक इस्लामिक परिवार में हुआ था। 27 जुलाई 2015 को शिलांग (मेघालय) में 84 साल की आयु में कार्डियक अटैक के कारण इनका निधन हो गया। इस दौरान डॉ. कलाम ने अपने जीवन काल में तमाम ऐसे कार्य किये जिस पर सभी भारतीय को अभिमान है। आज डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि है।
अब्दुल कलाम की प्रारंभिक शिक्षा
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा Schwartz Higher Secondary School रामानाथपुरम, तमिलनाडु से पूरी की थी। यहां उन्होने 10 वीं की पढ़ाई पूरी की थी। हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद इन्होने साल 1954 में तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज से फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) विषय में बी0एस0सी की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद कलाम ने फिजिक्स और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई तमिलनाडु से की।
APJ Abdul Kalam DRDO बने वैज्ञानिक
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपनी पढ़ाई पूरी कर लेने के बाद उनके सामने 2 विकल्प मिले जिसमे से एक विकल्प रक्षा मंत्रालय (ministry of defense) का और दूसरा वायु सेना (air force) का था। कलाम वायु सेना में अपना कॅरियर बनाना चाहते थे। लेकिन, वायु सेना में सिलेक्शन नहीं हो पाने के बाद इन्होंने अपनी जिंदगी के चार दशक डीआरडीओ और इसरो में वैज्ञानिक के रूप में बिताए। अंततः डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के एरोनॉटिकल डिवेलपमेंट एस्टैब्लिश्मेंट में वैज्ञानिक बने। जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
DRDO में विकसित की लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल
डीआरडीओ में उन्हें बैलेस्टिक मिसाइल के लिए प्रोजेक्ट डेविल और प्रोजेक्ट वैलिएंट की जिम्मेदारी मिली। उनके नेतृत्व में ही भारत ने अग्नि, आकाश, नाग, पृथ्वी और त्रिशूल जैसी मिसाइल विकसित की और भारत को लंबी दूरी तक मार करने वाली इन विशेष मिसाइलों में आत्मनिर्भर कर दिया। लगातार सफल होते होते वे जल्दी ही देश में मिसाइल मैन के रूप में मशहूर हो गए थे।
अब्दुल कलाम का राजनीतिक सफर
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के राजनीतिक सफर कि शुरूआत प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार के रूप में हुई। इसके बाद उन्होने पोखरण में परमाणु परीक्षण की सफलता में बड़ा योगदान दिया। डॉ. कलाम को 2002 में भारत के राष्ट्रपति बनने का गौरव प्राप्त हुआ। इसके साथ डॉ. कलाम पद्मश्री और पद्मविभूषण दोनों पुरस्कारों से पहले ही सम्मानित हो चुके थे। इन्हें भारत रत्न अवॉर्ड भी मिल चुका है। तमाम बुलंदियों के बीच उन्होंने अपनी सादगी और विनम्रता कभी नहीं छोड़ी।
नाकामी ने किया था निराश
डॉ कलाम का जीवन बताता है कि वे कोई विशिष्ठ, सुख सुविधा या प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति नहीं थे। उन्होंने भौतिकी में स्तानक की डिग्री त्रिचिरापल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से हासिल की। अपनी लगन और प्रतिभा से उन्होंने शिक्षकों को बहुत प्रभावित किया। लेकिन बहुत कम अंकों से फाइटर पायलट बनने के ख्वाब से चूक गए क्योंकि 8 लोगों के चयन में उनका स्थान 9वां आया था। तमाम परेशनियों के बाद भी कलाम ने अपना हौसला नहीं खोया और देश हित में अपना योगदान देते रहें।





