बिलकिस बानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी का भाजपा पर तंज, कहा- 'अहंकारी BJP सरकार के...'

Bilkis Bano Case: राहुल गांधी ने सोशल मीड‍िया प्लेटफार्म 'एक्‍स' पर पोस्‍ट शेयर करते हुए ल‍िखा कि ''चुनावी फायदे के लिए 'न्याय की हत्या' की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है।
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नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार (8 जनवरी) को बिलकिस बानो के साथ रेप और उनके परिवार वालों की हत्या के 11 दोषियों की सज़ा में छूट देकर रिहाई करने के गुजरात सरकार के फ़ैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने गुजरात सरकार को खुब खरी-खरी सुनाते हुए इस मामले के सभी 11 दोषि‍यों को फिर से जेल भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का विपक्षी नेताओं ने जोरदार स्वागत किया। शीर्ष अदालत के इस फैसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने भी आपनी प्रत‍िक्र‍िया व्‍यक्‍त की।

राहुल गांधी ने बताया न्याय की जीत

राहुल गांधी ने सोशल मीड‍िया प्लेटफार्म 'एक्‍स' पर पोस्‍ट शेयर करते हुए ल‍िखा कि ''चुनावी फायदे के लिए 'न्याय की हत्या' की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है। आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर देश को बता दिया कि 'अपराधियों का संरक्षक' कौन है। बिलकिस बानो का अथक संघर्ष, अहंकारी बीजेपी सरकार के विरुद्ध न्याय की जीत का प्रतीक है।''

प्रियंका गांधी ने दी अपनी प्रतिक्रिया

इसके साथ प्रियंका गांधी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीड‍िया प्लेटफार्म 'एक्‍स' पर लिखा,' इस आदेश से भारतीय जनता पार्टी की महिला विरोधी नीतियों पर से पर्दा हट गया है। इसके बाद न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा। अपनी लड़ाई बहादुरी से जारी रखने के लिए बिलकिस बानो को बधाई।'

गुजरात सरकार के फौसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

गौरतलब है कि बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने और उनके घरवालों की हत्या करने वाले इन दोषियों को गुजरात सरकार ने 15 अगस्त 2022 को अपनी माफी नीति के तहत बरी कर दिया था। जिसके बाद गुजरात सरकार के इस फैसलो को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हत्या मामले में 11 दोषियों को रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले को पलट दिया। उच्च न्यायालय की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मुकदमा महाराष्ट्र में चला था इसलिए गुजरात सरकार दोषियों की रिहाई पर फैसला नहीं ले सकती थी।

क्‍या था पूरा मामला?

2002 के गुजरात दंगों के दौरान दाहोद जिले के रंधिकपुर गांव की बिलकिस अपने परिवार के 16 सदस्यों के साथ भाग कर पास के गांव छापरवाड के खेतों में छिप गई थी। 3 मार्च 2002 को वहां 20 से अधिक दंगाइयों ने हमला बोल दिया था। मामले में दायर चार्जशीट के अनुसार इस दौरान कई लोगों ने बिलकिस और उनके परिवार पर लाठियों और जंजीरों से हमला कर दिया था। जिसमें 5 माह की गर्भवती बिलकिस समेत कुछ और महिलाओं के साथ दुष्‍कर्म क‍िया गया। इसके बाद बिलकिस की 3 साल की बेटी समेत 7 लोगों की हत्या कर दी थी।

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