सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई मेट्रो पर आरे कॉलोनी में पेड़ काटने पर लगाया 10 लाख का जुर्माना

कोर्ट ने 24 अगस्त, 2022 को मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन को निर्देश दिया था कि वो अपने दिए गए हलफनामे का पालन करें और अगले आदेश तक पेड़ों की कोई कटाई नहीं करें।
सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की आरे कॉलोनी में मेट्रो कार शेड बनाने के लिए 84 पेड़ काटने की मंजूरी के बावजूद ज्यादा पेड़ काटने की कोशिश पर मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है। हालांकि, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने प्रोजेक्ट को ध्यान में रखते हुए 177 पेड़ काटने की अनुमति दे दी।

जनवरी में185 पेड़ काटने की अनुमति प्राधिकरण से मांगी गई

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हमने 19 दिसंबर, 2022 को 84 पेड़ काटने की अनुमति दी थी, क्योंकि आपने 84 पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी। जनवरी में आपने 185 पेड़ काटने की अनुमति प्राधिकरण से मांगी। मार्च में पेड़ काटने की अनुमति दे दी गई। आप 84 से ज्यादा पेड़ कैसे काट सकते हैं। आपने आदेश की अवमानना की है। कोर्ट के आदेश के ऊपर कोई कैसे जा सकता है। सुपरिटेंडेंट को जेल में होना चाहिए। अगर आपको 84 से ज्यादा पेड़ काटने थे, तो आपको कोर्ट आना चाहिए था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज्यादा पेड़ काटन के लिए कोर्ट आना चाहिए था

सुनवाई के दौरान मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम इसके लिए माफी मांगते हैं। मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के दौरान जब मेट्रो प्रशासन प्राधिकरण के पास गया तो कहा गया कि पिछला सर्वे 2019 में हुआ था, जिसके आधार पर 84 पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी। प्राधिकरण ने नये सर्वे की बात कही। तब चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप 84 से ज्यादा पेड़ काटने के लिए प्राधिकरण के पास कैसे जा सकते हैं। आपको कोर्ट आना चाहिए था।

मेहता ने कहा कि 53 पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा

कोर्ट ने मेहता से पूछा कि आप 84 पेड़ों की जगह 177 पेड़ काटना चाहते हैं। आप कितने पेड़ ट्रांसप्लांट करेंगे। तब मेहता ने कहा कि 53 पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा। तब चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप कितने नये पेड़ लगाएंगे। तब मेहता ने कहा कि 1533, तब कोर्ट ने कहा कि हम 177 पेड़ काटने की अनुमति देते हैं लेकिन आपने हमारे आदेश की अवमानना की कोशिश की है। कोर्ट ने मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन पर दस लाख रुपये जुर्माना का आदेश दिया।

कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया जा रहा

कोर्ट ने 24 अगस्त, 2022 को मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन को निर्देश दिया था कि वो अपने दिए गए हलफनामे का पालन करें और अगले आदेश तक पेड़ों की कोई कटाई नहीं करें। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर पेड़ों की कटाई हुई तो हम सख्त कार्रवाई करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन ने भरोसा दिलाया कि वहां पेड़ों की कटाई नहीं की जा रही है। 5 अगस्त, 2022 को सुनवाई के दौरान मुंबई मेट्रो रेल कारपोरेशन के लिए पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि 2019 में हुई सुनवाई के बाद से एक पेड़ नहीं काटा गया। कुछ झाड़ियां जरूर हटाई गई हैं। 28 जुलाई, 2022 को वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा था कि 2019 में आए कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है।

आरे फॉरेस्ट में पेड़ों को काटने पर रोक लगा दी थी

सुप्रीम कोर्ट ने 7 अक्टूबर, 2019 को आरे फॉरेस्ट में पेड़ों को काटने पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि आरे फॉरेस्ट में यथास्थिति बहाल की जाए। पेड़ों को काटना तत्काल रोका जाए। कोर्ट ने कहा था कि पौधों के जीवित बचने की दर का विश्लेषण किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों को काटने का विरोध करने के दौरान गिरफ्तार सभी लोगों को रिहा करने का आदेश दिया था।

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