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Monday, March 2, 2026
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क्‍या दिल्‍ली में बढ़ रही लापता लोगों की संख्या? दिल्ली पुलिस ने बताया क्‍या है सच्‍चाई

दिल्ली में इन दिनों एक शोर सुनाई दे रहा है कि राजधानी से लोग अचानक लापता हो रहे हैं। इस बीच, पुलिस ने लापता मामलों को लेकर स्थिति से अवगत कराया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । राजधानी दिल्ली में लोगों के लापता होने की सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। अब इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने स्थिति स्‍पष्‍ट की है। 2026 के पहले 36 दिनों में 2,884 लोग लापता हुए, जिनमें से सिर्फ 409 लोग ही बरामद हुए हैं। इन घटनाओं में बच्चों और महिलाओं की संख्‍या ज्‍यादा बताई गई है। 

रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 1 जनवरी से 5 फरवरी के बीच 616 बच्चे और 1,372 महिलाएं लापता हुईं। इस आंकड़े के आधार पर कुछ रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दावा किया गया कि राजधानी में अचानक लापता लड़कियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। दिल्ली पुलिस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लापता होने के मामले में कुछ लोग पैसे देकर ये खबर फैला रहे हैं। पुलिस ने इस स्थिति पर नियंत्रण के लिए उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

दिल्ली पुलिस का बयान

दिल्ली पुलिस ने लापता लड़कियों की बढ़ती संख्या पर सोशल मीडिया पर फैल रहे हाइप को लेकर ताजा बयान जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, कुछ सुरागों के आधार पर यह सामने आया कि दिल्ली में लापता लड़कियों के मामलों को लेकर जो अफवाहें फैल रही हैं, वह पेड प्रमोशन के जरिए बढ़ाई गईं। दिल्ली पुलिस ने X पर पोस्ट कर कहा कि पैसे के लिए डर और घबराहट फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने साफ किया कि ऐसे झूठे और भ्रामक संदेशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो सामाजिक माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। 

लापता लोगों की संख्‍या में पिछले वर्षों के मुकाबले आयी कमी

दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर संजय त्यागी ने लापता व्यक्तियों, खासकर बच्चों के मामलों पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि दिल्ली में लापता व्यक्तियों की संख्या में घबराने जैसा कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में लापता व्यक्तियों के मामलों की रिपोर्टिंग पिछले वर्षों के समान अवधि के मुकाबले कम रही है।

संजय त्यागी ने आगे कहा कि लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट स्थानीय थाने, ऑनलाइन पोर्टल और ERSS-112 के माध्यम से दर्ज कर सकते हैं। तय SOP (Standard Operating Procedure) के अनुसार, लापता व्यक्ति की तलाश तुरंत शुरू की जाती है और बच्चों के मामलों को सबसे पहले देखा जाता है। उन्‍होंने यह भी बताया कि सभी जिलों में डेडिकेटेड मिसिंग पर्सन स्क्वाड और क्राइम ब्रांच में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट सक्रिय हैं, ताकि लापता मामलों की त्वरित और प्रभावी ढंग से जांच की जा सके।

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