नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में इस बार ABVP ने धूम मचा दी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने अध्यक्ष पद समेत तीन प्रमुख सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस का छात्र संगठन NSUI केवल उपाध्यक्ष पद तक ही सीमित रह गया।
पिछली बार की तुलना में NSUI को इस बार एक सीट का नुकसान हुआ और उनका अध्यक्ष पद भी ABVP के हाथों से निकल गया। इस बार के चुनाव में NSUI को सिर्फ उपाध्यक्ष के पद पर जीत मिली है।
क्या सच में DUSU अध्यक्ष को मिलता है वेतन?
इस बार DUSU के अध्यक्ष पद पर आर्यन मान का कब्जा हो चुका है। DUSU के चार पद में से तीन पर ABVP ने अपना परचम लहराया है। हालांकि, छात्रों को जानकर हैरानी होगी कि इस पद पर कोई सैलरी नहीं मिलती, यानी आर्यन मान को सीधे तौर पर कोई वेतन या मासिक आय नहीं प्राप्त होगी।
DUSU अध्यक्ष को कितनी मिलती है सैलरी?
हालांकि, इस पद का बजट काफी बड़ा होता है। जीतने वाले संगठन को कुल 20 लाख रुपये का बजट दिया जाता है, जिसे छात्रसंघ की गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रोग्राम, इवेंट्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर खर्च किया जाता है। इस पैसे का उपयोग किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया जाता।
ABVP के गोविंद तंवर उपाध्यक्ष पद पर हारे
सचिव पद पर कुणाल चौधरी और संयुक्त सचिव पद पर दीपिका झा ने जीत हासिल की। इन तीनों पदों पर ABVP के उम्मीदवार पहले दौर से ही रुझानों में आगे थे और अंतिम मतगणना में उनकी जीत पक्की हुई। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर गोविंद तंवर को हार का सामना करना पड़ा।
NSUI केवल उपाध्यक्ष पद जीत सका
वही, इस बार के छात्रसंघ चुनाव में NSUI का बुरा हाल रहा है। संगठन की ओर से केवल उपाध्यक्ष पद पर राहुल झांसला ने जीत हासिल की। अध्यक्ष पद के जोसलिन नंदिता चौधरी, सचिव पद के कबीर और संयुक्त सचिव पद के लवकुश भड़ाना को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
DUSU चुनाव में वोटिंग और कार्यकाल
छात्रसंघ चुनाव के लिए मतदान गुरुवार को हुआ, जिसमें 39.45 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। DUSU के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव का कार्यकाल कुल 11 महीने का होता है और 12वें महीने नए चुनाव कराए जाते हैं। अध्यक्ष का पद सबसे अहम माना जाता है, क्योंकि यह संगठन के सभी कामकाज की निगरानी करता है।
DUSU प्रेसिडेंट की शक्ति और जिम्मेदारी
DUSU अध्यक्ष का पद केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि काफी शक्तिशाली माना जाता है। इस पद पर नियुक्त अध्यक्ष को अलग ऑफिस मिलता है और वह यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक फैसलों में भाग लेता है। यदि कोई निर्णय उन्हें मंजूर नहीं होता, तो वे अपना विरोध भी दर्ज करा सकते हैं।
अध्यक्ष को यूनिवर्सिटी से जुड़ी सभी समस्याओं को हजारों छात्रों का नेतृत्व करते हुए सुलझाना होता है। यह पद छात्र नेताओं को राजनीतिक अनुभव प्रदान करता है और भविष्य में राजनीति में कदम रखने के लिए महत्वपूर्ण अवसर भी देता है।





