नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । दिल्ली की हवा इन दिनों अत्यधिक जहरीली हो चुकी है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने लगभग 464 का खतरनाक स्तर पार कर लिया है, जबकि कुछ इलाकों में यह इससे भी अधिक मापा गया। इतना खराब AQI केवल धुंध या मौसम की समस्या नहीं है, बल्कि यह अब सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले चुका है।
AIIMS के पल्मोनरी मेडिसिन और स्लीप डिसऑर्डर्स विभाग के प्रमुख डॉ. अनंत मोहन ने चेतावनी दी है कि दिल्ली की हवा वर्तमान में गंभीर और जानलेवा श्रेणी में आ चुकी है। अस्पतालों में आने वाले मरीजों की संख्या में इस बार असामान्य वृद्धि देखी जा रही है। खासकर अक्टूबर-नवंबर के महीने में, जो पहले से ही वायु प्रदूषण के लिए संवेदनशील माने जाते हैं, इस बार हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं।
वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य पर असर
वायु में मौजूद छोटे कण जैसे PM2.5 और PM10 फेफड़ों के माध्यम से रक्त प्रवाह में प्रवेश कर पूरे शरीर में फैल सकते हैं। इसका असर विभिन्न अंगों और प्रणालियों पर पड़ता है:-
फेफड़े और श्वसन तंत्र: अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, खांसी, गले में जलन, श्वसन क्षमता में कमी।
हृदय और रक्त-नलिकाएँ: हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक, रक्त प्रवाह में समस्या।
लंबी अवधि के गंभीर रोग: फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)।
दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य: स्मृति और मानसिक क्षमता में गिरावट, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं।
विशेष रूप से बच्चे, बुज़ुर्ग, अस्थमा या हृदय रोग के मरीज प्रदूषण से अधिक प्रभावित होते हैं।
बचाव के उपाय
– दिल्ली में जब हवा अत्यधिक प्रदूषित हो, तो इन सावधानियों का पालन करें:
– बाहर निकलते समय N-95 मास्क पहनें।
– सुबह-शाम या धुंध वाले समय में गैरजरूरी बाहर निकलने से बचें।
– घर और ऑफिस में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
– पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
– धूम्रपान और धुएँ वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
– सांस लेने में कठिनाई, खांसी या गले में जलन होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
वायु प्रदूषण का शरीर पर प्रभाव
वायु प्रदूषण का असर शरीर के विभिन्न अंगों पर अलग-अलग होता है। दिमाग पर इसका प्रभाव स्ट्रोक, डिमेंशिया और पार्किंसंस रोग के रूप में दिखाई दे सकता है, वहीं आंखों में कंजंक्टिवाइटिस, ड्राई आई डिजीज और मोतियाबिंद जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नाक पर यह एलर्जी पैदा करता है और दिल को प्रभावित कर इस्केमिक हार्ट डिजीज, हाइपरटेंशन, हार्ट फेल्योर और एरिथमिया या अनियमित धड़कन जैसी स्थितियों का खतरा बढ़ा देता है।
फेफड़ों पर इसका असर लंग कैंसर, लैरींगाइटिस, अस्थमा, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, ब्रोन्किइक्टेसिस और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के रूप में हो सकता है। लिवर पर प्रदूषण से हेपेटिक स्टीटोसिस और हेपैटोसेलुलर कार्सिनोमा जैसी समस्याएं उभर सकती हैं। रक्त में इसका प्रभाव ल्यूकेमिया, एनीमिया, सिकल सेल और इंट्रावैस्कुलर कोएग्युलेशन जैसी बीमारियों के रूप में दिखाई देता है।
फैट पर इसका असर मेटाबोलिक सिंड्रोम और मोटापे के रूप में हो सकता है, जबकि पेनक्रियाज पर यह टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ाता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम प्रभावित होने पर गैस्ट्रिक और कोलोरेक्टल कैंसर या इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) का खतरा होता है। यूरोजेनिटल अंगों में ब्लैडर कैंसर, किडनी कैंसर और प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
हड्डियों और जोड़ पर प्रदूषण रुमेटिक डिजीज, ऑस्टियोपोरोसिस और कमजोर हड्डियों के रूप में असर डाल सकता है, वहीं त्वचा पर यह एटॉपिक स्किन रोग, त्वचा की समय से पहले उम्र बढ़ना, यूट्रिकेरिया, डर्मोग्राफिज्म और मुंहासे जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। कुल मिलाकर वायु प्रदूषण शरीर के लगभग सभी अंगों को प्रभावित करता है और जीवन प्रत्याशा यानी लाइफ एक्सपेक्टेंसी को कम कर सकता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा सलाह का विकल्प न समझें। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए हमेशा विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श करें।





